राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने भरतपुर में महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय के पंचम दीक्षांत समारोह में कहा कि वैश्विक स्तर पर ज्ञान का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और वैज्ञानिक अनुसंधान के चलते कुशल कामगारों की मांग बढ़ेगी। उन्होंने युवाओं से तार्किक और रचनात्मक सोच विकसित करने का आह्वान किया ताकि वे बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को तैयार कर सकें।
उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल जीविकोपार्जन का माध्यम नहीं बल्कि समाज को दिशा देने का साधन है। शिक्षा को बीज की तरह बताया जो समाज को फल, फूल और छाया देता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में पारदर्शी मूल्यांकन प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता बताई ताकि युवाओं की बौद्धिक क्षमता का सही आंकलन हो सके।
राज्यपाल ने भारत की पुरातन शिक्षा पद्धति और गुरुकुल परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि शोध और अनुसंधान को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने भास्कराचार्य के गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत का उदाहरण देते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा की श्रेष्ठता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों में विदेशी विद्यार्थी भी शिक्षा ग्रहण करते थे।
उन्होंने विश्वविद्यालयों से शिक्षा को अधिक से अधिक फैलाने और युवाओं को संस्कृति व अनुसंधान पर गर्व करने योग्य बनाने की अपील की। समारोह में बालिकाओं की भागीदारी पर उन्होंने विशेष प्रसन्नता जताई और नारी शक्ति की सराहना की।
उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि विश्वविद्यालय ज्ञान का आलोक फैलाने वाले केंद्र हैं और आचार्य विद्यार्थियों को बौद्धिक रूप से सक्षम बनाकर समाज को नई दिशा दे सकते हैं। कुलगुरु त्रिभुवन शर्मा ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी दी।