विदेश मंत्री जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत ऐसी वैश्विक व्यवस्था चाहता है जो निष्पक्ष हो और जिसमें सभी देशों का प्रतिनिधित्व हो, न कि कुछ देशों का प्रभुत्व। वे राजधानी में बिम्सटेक देशों की सांस्कृतिक संध्या ‘सप्त सुर’ में शामिल हुए, जहां सदस्य देशों के पारंपरिक संगीत प्रस्तुत किए गए। उन्होंने परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि परंपराएं हमारी पहचान को परिभाषित करती हैं और हमारे जैसे देशों के लिए ये शक्ति का स्रोत हैं।
जयशंकर ने कहा कि हम एक जटिल और अनिश्चित समय में जी रहे हैं, जहां हमारी सामूहिक इच्छा एक ऐसी व्यवस्था की है जो प्रतिनिधित्वकारी हो। उन्होंने यह भी कहा कि इस बदलाव की मांग को अक्सर राजनीतिक या आर्थिक पुनर्संतुलन के रूप में देखा जाता है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और नाटो देश भारत पर अपनी व्यापार नीति थोपने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में अमेरिका ने भारत के कई उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिससे भारत की पारंपरिक व्यापार नीति और घरेलू बाजार की सुरक्षा को चुनौती मिल रही है2।
जयशंकर ने यह भी कहा कि अगर हम भविष्य को आकार देने को लेकर आश्वस्त होना चाहते हैं, तो हमें यह समझना होगा कि हम क्या हैं। उन्होंने परंपराओं को शक्ति का स्रोत बताते हुए कहा कि यही हमारी पहचान को मजबूत करती हैं और हमें वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास देती हैं।