घटिया मटेरियल से चंद सालों में जर्जर हुईं इमारतें, बारिश में लीकेज से रहने वाले बेहाल
नाथद्वारा: मुख्यमंत्री जन आवास योजना, जिसका उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को आवास उपलब्ध कराना है, नाथद्वारा में भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही है। योजना के तहत लाखों की लागत से निर्मित इमारतें उद्घाटन के महज एक साल बाद ही जर्जर अवस्था में पहुंच गई हैं। यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि यहां रह रहे सैकड़ों परिवारों की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ भी है।
बाहर से नई और आकर्षक दिखने वाली इन इमारतों के भीतर की स्थिति दिल दहला देने वाली है। भवनों के अंदर रंग-रोगन तक उड़ चुका है। दीवारों का प्लास्टर उखड़ रहा है, जगह-जगह दरारें उभर आई हैं और बारिश के मौसम में छत से पानी झरनों की तरह बहता है। कमरों में सीलन की मोटी परत जम गई है, जिससे निवासियों का जीवन दयनीय हो गया है।
इन घरों में रह रहे लोगों का कहना है कि ठेकेदार ने लागत बचाने के लिए घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया। परिणामस्वरूप बरसात में पूरी बिल्डिंग पानी से भर जाती है और दीवारें व छतें कमजोर होकर गिरने की कगार पर आ जाती हैं। सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि भवनों की मजबूती पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय निवासियों ने कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। भ्रष्टाचार की परतें साफ दिखाई देने के बावजूद लापरवाही जारी है। सवाल यह है कि जब योजना का उद्देश्य गरीबों को सुरक्षित आवास देना था, तो इस स्तर की अनदेखी क्यों की गई और दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।