राजस्थान में जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले को लेकर सियासी और कानूनी हलचल तेज हो गई है। मामले में रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल की तलाश में एसीबी की टीमें जुटी हुई हैं। माना जा रहा है कि उनसे पूछताछ में कई अहम खुलासे हो सकते हैं। इसी बीच अग्रवाल ने राहत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
एफआईआर रद्द करने की मांग
सुबोध अग्रवाल ने अपनी याचिका में एसीबी द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने दावा किया है कि जल जीवन मिशन से जुड़े 95 प्रतिशत वर्क ऑर्डर उनके कार्यकाल से पहले, तत्कालीन एसीएस सुधांश पंत की अध्यक्षता वाली वित्त समिति द्वारा स्वीकृत किए गए थे। याचिका में कहा गया है कि उनका पीएचईडी में कार्यकाल 18 अप्रैल 2022 से शुरू हुआ था। इससे पहले गणपति ट्यूबवेल और श्याम ट्यूबवेल ने इरकॉन के कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर टेंडर हासिल कर लिए थे। अग्रवाल का दावा है कि उनके कार्यकाल में 10 प्रतिशत से कम मूल्य के टेंडर ही मंजूर हुए।
सरकार को नुकसान नहीं: पक्ष
अग्रवाल की ओर से एडवोकेट दीपक चौहान ने दलील दी है कि उनकी अध्यक्षता वाली वित्त समिति ने संबंधित टेंडरों पर कोई भुगतान नहीं किया, इसलिए सरकार को कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ। इरकॉन के ईमेल मिलने के बाद उन्होंने हाई लेवल कमेटी गठित की, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर दोनों फर्मों के टेंडर निरस्त कर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया गया। साथ ही अधिकारी विशाल सक्सेना के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। एसीबी ने सक्सेना के बयानों के आधार पर कार्रवाई की है, जबकि अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने स्वयं सक्सेना के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
एसीबी की कार्रवाई तेज
हाल ही में एसीबी ने राजस्थान समेत अन्य राज्यों में करीब 15 ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 9 को एसीबी कोर्ट में पेश कर 3 दिन के रिमांड पर भेजा गया है। एसीबी ने दिल्ली और जयपुर स्थित अग्रवाल के ठिकानों पर भी रेड की, लेकिन वे वहां नहीं मिले। इसके बाद उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। अब इस मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई अहम मानी जा रही है। जांच और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण पर सबकी नजरें टिकी हैं।
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