पादूकलां सहित आसपास के गांवों में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया पर्व, आंवले के वृक्ष की परिक्रमा कर महिलाओं ने की मंगलकामनाएं
पादूकलां: कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में शुक्रवार को आंवला नवमी का पर्व धार्मिक श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। सियाराम धाम परिसर में साधु-संतों के सानिध्य में महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार आंवले के वृक्ष की पूजा-अर्चना और परिक्रमा की।
सुबह सूर्योदय के साथ ही मंदिरों, बगीचों और सार्वजनिक स्थलों पर महिलाएं सोलह श्रृंगार में सजी-धजी नज़र आईं। उन्होंने कच्चा धागा बांधकर, दूध अर्पित कर, कपूर और घी के दीपक जलाकर आंवले के वृक्ष की पूजा की। पूजा के पश्चात महिलाओं ने ब्राह्मणों को भोजन करवाकर दक्षिणा दी।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर संतदासजी महाराज ने आंवला नवमी की कथा सुनाई, जबकि महंत राधादास त्यागीजी महाराज ने पर्व का महत्व बताते हुए कहा कि यह दिन प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सनातन संस्कृति के संरक्षण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस दिन की गई पूजा, तर्पण और दान-पुण्य से अक्षय फल की प्राप्ति होती है और पति-पुत्र की दीर्घायु की कामना पूर्ण होती है।
देवकी देवी बोहरा और ममता टाक ने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु के दामोदर स्वरूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग की शुरुआत इसी दिन हुई थी और नौ दिनों तक भगवान विष्णु का वास आंवले के वृक्ष में माना जाता है।
कस्बे के अलावा पालड़ीकलां, बिखरनिया कलां, मांडलजोधा, सथानाकलां, पादूखुर्द, अरनियाला, बग्गड़, नथावड़ा और मेवड़ा सहित आसपास के गांवों में भी महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक पूजा कर पति-पुत्र की लंबी आयु और परिवार की समृद्धि की कामना की। जिन स्थानों पर आंवले के वृक्ष नहीं थे, वहां महिलाओं ने घरों में पौधे स्थापित कर पूजा की।
पूजा के बाद महिलाएं आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन और कथा श्रवण करती रहीं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, आंवले के नीचे बैठने से रोगों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
दिनभर क्षेत्र में धार्मिक और आस्था से भरा वातावरण बना रहा। इस अवसर पर राधादास त्यागीजी महाराज, ममता टाक, देवकी देवी बोहरा, शारदा बोहरा, किरण लखारा, राधिका लखारा, पूजा, शांति देवी, भंवरी देवी, सुमन, दुर्गादेवी, गीता देवी, अनीशा, मंजू, विमला सहित अनेक महिलाएं उपस्थित रहीं।