RPSC पेपर लीक केस: ₹60 लाख में खरीदा गया कृषि विज्ञान का पेपर, SOG जांच में खुलासा

4 Min Read

SOG की पूछताछ में आरोपी अशोक कुमार यादव ने स्वीकार किया कि उसने पेपर माफिया गिरोह के सदस्य विनोद रेवाड़ से ₹7 लाख में सॉल्व्ड पेपर खरीदने का सौदा किया था।

राजस्थान की चर्चित भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में एसओजी जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चिरंजी लाल मीणा और उप पुलिस अधीक्षक सलेह मोहम्मद की पूछताछ में आरोपी अशोक कुमार यादव ने स्वीकार किया कि उसने पेपर माफिया गिरोह के सदस्य विनोद रेवाड़ से ₹7 लाख में सॉल्व्ड पेपर खरीदने का सौदा किया था। उसने बताया कि सामान्य ज्ञान का पेपर उपलब्ध नहीं होने के कारण उसके कम अंक आए, लेकिन कृषि विज्ञान का सॉल्व्ड पेपर परीक्षा से एक दिन पहले 10 अक्टूबर 2022 को मिल गया था, जिसे पढ़कर उसने अच्छे अंक हासिल किए।

जांच में सामने आया कि विनोद रेवाड़ को यह प्रश्नपत्र कथित पेपर माफिया अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा से मिला था। एसओजी के अनुसार यह एक संगठित गिरोह था, जो भर्ती परीक्षाओं में सेंध लगाकर अभ्यर्थियों को अवैध लाभ पहुंचा रहा था।

पूछताछ में अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा ने स्वीकार किया कि कृषि विज्ञान का प्रश्नपत्र उसे तत्कालीन Rajasthan Public Service Commission सदस्य बाबूलाल कटारा से मिला था, जिसके बदले ₹60 लाख का भुगतान किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि उस समय विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी अलग-अलग सदस्यों को दी गई थी और कृषि विज्ञान का पेपर बाबूलाल कटारा के जिम्मे था। आरोप है कि प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उसे अवैध रूप से सरकारी आवास ले जाया गया, जहां उनके भांजे विजय डामोर ने उसे रजिस्टर में उतारा और बाद में वही पेपर अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा को उपलब्ध कराया गया।

एसओजी जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। विजय डामोर भी इसी भर्ती परीक्षा में भूगोल विषय का अभ्यर्थी था। चूंकि भूगोल का प्रश्नपत्र बाबूलाल कटारा के जिम्मे नहीं था, इसलिए कथित तौर पर अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा से अलग डील की गई। आरोप है कि ₹60 लाख लेने के साथ बाबूलाल कटारा ने अपने भांजे के लिए सामान्य ज्ञान और भूगोल का पेपर उपलब्ध कराने की शर्त रखी थी।

पूछताछ में शेर सिंह मीणा ने बताया कि उसने दोनों प्रश्नपत्रों का इंतजाम कर परीक्षा वाले दिन विजय डामोर के मोबाइल पर भेज दिया था, लेकिन विजय डामोर ने मोबाइल चेक नहीं किया और बिना पेपर देखे परीक्षा केंद्र में प्रवेश कर गया। इस कारण उसे कथित लीक पेपर का फायदा नहीं मिल पाया।

एसओजी के अनुसार अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा ने प्रश्नपत्रों की प्रतियां तैयार कर विनोद रेवाड़ सहित गिरोह के अन्य सदस्यों भूपेंद्र सारण और सुरेश ढाका को उपलब्ध कराईं। इनके जरिए अन्य अभ्यर्थियों तक पेपर पहुंचाए गए और करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की गई।

मामले में अब तक बाबूलाल कटारा, विजय डामोर और अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अधीक्षक कुंदन कंवरिया तथा जांच अधिकारी चिरंजी लाल मीणा आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रहे हैं।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस Vishal Bansal ने कहा कि यह मामला प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गंभीर हमला है और इसमें शामिल सभी आरोपियों, बिचौलियों तथा लाभार्थियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एसओजी की जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *