ईरान-अमेरिका टकराव तेज: होर्मुज स्ट्रेट में हमले के बाद जवाबी कार्रवाई, ट्रंप बोले- ‘बातचीत और सीजफायर जारी’

पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। Strait of Hormuz में अमेरिकी युद्धपोतों पर हमले के दावों के बाद अमेरिका और ईरान आमने-सामने आ गए हैं। अमेरिकी सेना का कहना है कि ईरान ने मिसाइल, ड्रोन और छोटे बोट्स के जरिए अमेरिकी नौसेना के तीन युद्धपोतों को निशाना बनाने की कोशिश की, जिसके बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक USS Truxtun, USS Rafael Peralta और USS Mason इंटरनेशनल समुद्री मार्ग से गुजर रहे थे। इसी दौरान ईरान की ओर से कथित हमला किया गया। हालांकि अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि सभी हमलों को हवा में ही नाकाम कर दिया गया और किसी भी जहाज को नुकसान नहीं हुआ।
इसके बाद अमेरिका ने ईरान के Qeshm Island और Bandar Abbas में मौजूद सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हमलों में मिसाइल लॉन्च साइट्स, ड्रोन कंट्रोल सिस्टम और सैन्य कमांड सेंटर को निशाना बनाया गया। अमेरिका ने कहा कि यह कार्रवाई “सेल्फ-डिफेंस” के तहत की गई है और उसका उद्देश्य अपनी सेना की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अभी भी जारी है और सीजफायर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी युद्धपोत सुरक्षित तरीके से होर्मुज पार कर गए और जवाबी कार्रवाई में ईरानी हमलावरों को “पूरी तरह तबाह” कर दिया गया। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए तो अमेरिका भविष्य में और ज्यादा “कड़ी और हिंसक कार्रवाई” करेगा।
दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि पहले हमला अमेरिकी सेना ने किया। ईरानी सेना के अनुसार अमेरिकी बलों ने एक ईरानी तेल टैंकर और अन्य जहाजों को निशाना बनाया, साथ ही Qeshm Island और तटीय इलाकों में हवाई हमले किए। ईरान ने इसे सीजफायर का उल्लंघन बताया है।
इस टकराव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि Strait of Hormuz वैश्विक तेल सप्लाई का सबसे अहम समुद्री मार्ग माना जाता है। यहां बढ़ता सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों और सप्लाई चेन पर बड़ा असर डाल सकता है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से बयानबाजी तेज है, लेकिन हालात जिस तेजी से बदल रहे हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह तनाव और भी गंभीर रूप ले सकता है।