PM Modi ने दिल्ली में अष्टलक्ष्मी महोत्सव का उद्घाटन किया, कहा- ‘दिल्ली आज पूर्वोत्तर मय हो गई है

By Editor
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PM Modi ने अष्टलक्ष्मी महोत्सव का उद्घाटन किया, दिल्ली को बताया ‘पूर्वोत्तर मय’

PM Modi ने शुक्रवार को दिल्ली के भारत मंडपम में तीन दिवसीय अष्टलक्ष्मी महोत्सव का उद्घाटन किया। इस महोत्सव का आयोजन पूर्वोत्तर भारत के संस्कृति, व्यापार, और समृद्धि को प्रमोट करने के लिए किया गया है, जो देशभर में पूर्वोत्तर के योगदान और संभावनाओं को प्रदर्शित करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन के अवसर पर कहा कि दिल्ली आज पूरी तरह से “पूर्वोत्तर मय” हो गई है और इस आयोजन के माध्यम से दिल्ली में पूर्वोत्तर के विविध रंगों का सुंदर इंद्रधनुष देखा जा रहा है।

दिल्ली को ‘पूर्वोत्तर मय’ बताते हुए PM Modi ने जताया गर्व

PM Modi ने कहा कि दिल्ली में अष्टलक्ष्मी महोत्सव के माध्यम से पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध संस्कृति, कला, और व्यापार को एक नया मंच मिला है। उन्होंने कहा, “आज दिल्ली में पूर्वोत्तर का रंग हर कहीं दिखाई दे रहा है। यह महोत्सव एक शानदार अवसर है, जहां हम पूर्वोत्तर भारत की ताकत और उसकी विविधता को एकजुट होकर देख रहे हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि इस महोत्सव के दौरान देश और दुनिया को पूर्वोत्तर के अद्भुत उत्पादों, व्यापार, और सांस्कृतिक धरोहरों से परिचित कराया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस आयोजन को एक ऐतिहासिक कदम बताया, जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर को वैश्विक व्यापार और निवेश के केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

पूर्वोत्तर के व्यापार और निवेश पर जोर

PM Modi ने इस महोत्सव के दौरान पूर्वोत्तर भारत में व्यापार और कारोबार के लिए नए द्वार खोलने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “यह महोत्सव सिर्फ सांस्कृतिक मेला नहीं है, बल्कि यह व्यापार और निवेश के लिहाज से एक बहुत बड़ा अवसर है। यहां पर व्यापार-कारोबार से जुड़े समझौते होंगे, जो पूर्वोत्तर भारत के उत्पादों को दुनिया भर में पहचान दिलाने में मदद करेंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि अष्टलक्ष्मी महोत्सव एक ऐसा मंच है जहां पूर्वोत्तर के उत्पाद और व्यापार वैश्विक स्तर पर पहचान प्राप्त करेंगे। यह आयोजन उन देशों और निवेशकों के लिए बेहतरीन अवसर प्रस्तुत करता है जो पूर्वोत्तर भारत में निवेश करना चाहते हैं।

PM Modi ने आगे कहा, “यह पहली बार हो रहा है कि पूर्वोत्तर के सभी राज्य एक मंच पर आकर अपने उत्पादों, संस्कृति और व्यापार को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत कर रहे हैं। इस आयोजन के माध्यम से पूर्वोत्तर में बड़े पैमाने पर निवेश के द्वार खुलने वाले हैं।”

पूर्वोत्तर के लोगों की भागीदारी और योगदान

PM Modi ने इस आयोजन के आयोजकों को और खासकर पूर्वोत्तर के सभी राज्यों के निवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा, “मैं अष्टलक्ष्मी महोत्सव के आयोजकों को बधाई देता हूं, साथ ही सभी पूर्वोत्तर राज्यों के निवासियों को इस पहल में भाग लेने के लिए धन्यवाद देता हूं। यह महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि एक व्यापारिक आंदोलन है, जिससे पूर्वोत्तर के हर नागरिक को लाभ होगा।”

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि यह महोत्सव पूर्वोत्तर के लोगों की मेहनत और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “यह महोत्सव पूर्वोत्तर के लोगों के संघर्ष, उनकी संस्कृति, उनके काम, और उनके सपनों का प्रतीक है। यह उनका समय है और वे अपने योगदान को देशभर में और दुनिया में प्रदर्शित कर रहे हैं।”

पूर्वोत्तर में विकास और निवेश की नई संभावनाएं

PM Modi ने इस आयोजन को पूर्वोत्तर के विकास में एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव व्यापार और निवेश के लिए एक प्लेटफॉर्म बनेगा, जिससे न केवल क्षेत्रीय विकास होगा, बल्कि इससे पूरे देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा, “पूर्वोत्तर क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं और इस महोत्सव के जरिए हम इन संभावनाओं को पूरी दुनिया के सामने लाने का काम कर रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में पूर्वोत्तर के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं, जिससे इस क्षेत्र का समग्र विकास हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस महोत्सव के जरिए पूर्वोत्तर के व्यापार और संस्कृति को नया जीवन मिलेगा और यहां के नागरिकों को बेहतर जीवनस्तर मिलेगा।

अष्टलक्ष्मी महोत्सव: एक ऐतिहासिक पहल

अष्टलक्ष्मी महोत्सव का आयोजन इस क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक पहल है, क्योंकि यह महोत्सव न केवल सांस्कृतिक समृद्धि को प्रमोट करता है, बल्कि व्यापार और निवेश के अवसर भी प्रदान करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस महोत्सव को पूर्वोत्तर के लिए एक “विशाल मंच” बताया और कहा कि यह आयोजन दुनिया को पूर्वोत्तर के अद्भुत और दुर्लभ उत्पादों से परिचित कराने में मदद करेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि इस महोत्सव के दौरान व्यापारिक समझौतों के साथ-साथ सांस्कृतिक मेलों और प्रदर्शनियों का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर पूर्वोत्तर के उत्पादों की मांग बढ़ेगी।

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