मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण की संवैधानिक वैधता को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले को ‘टॉप ऑफ द बोर्ड’ श्रेणी में रखते हुए 23 सितंबर से प्रतिदिन सुनवाई करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अदालत में पक्ष रखा।
इस फैसले के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तरह डॉ मोहन यादव सरकार भी राजनीतिक दुर्भावना और सोची-समझी रणनीति के तहत इस अहम मुद्दे को लंबित कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पिछड़े वर्ग के संवैधानिक अधिकारों को रोक रही है और युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रही है, जिसका उसे राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा। पटवारी ने यह भी कहा कि कांग्रेस सामाजिक न्याय की इस लड़ाई को हर मोर्चे पर लड़ेगी और ओबीसी वर्ग के अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष करेगी।
वहीं भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने इस फैसले को सरकार की जीत बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कमलनाथ सरकार के दौरान गलत आंकड़े दिए जाते थे और अदालत में वकील नहीं खड़े किए जाते थे ताकि पिछड़े वर्ग को उनका हक न मिले। आशीष अग्रवाल ने कहा कि आज मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा सरकार पूरी प्रतिबद्धता और सामूहिक प्रयास से यह सुनिश्चित कर रही है कि ओबीसी वर्ग को उनका हक मिले और उनकी तरक्की लगातार बढ़े।