उत्तर प्रदेश के Sambhal Jama Masjid को लेकर इन दिनों एक बड़ा विवाद चल रहा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यहां पहले हरिहर मंदिर था, जिसे बाद में Sambhal Jama Masjid में बदल दिया गया। इस विवाद के तूल पकड़ने के बाद हिंदू पक्ष ने कोर्ट का रुख किया, जिसके बाद Sambhal Jama Masjid के सर्वे के लिए एक जांच कमेटी गठित की। यह सर्वे 29 नवंबर तक रिपोर्ट देने के लिए आदेशित किया गया था।
इस मुद्दे ने जब राजनीतिक रंग लिया, तो मीडिया में भी इसे लेकर बहस शुरू हो गई। खासकर न्यूज चैनल ‘आज तक’ पर हुई बहस में हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी आमने-सामने आए। इस बहस के दौरान ओवैसी ने अपने मुस्लिम समुदाय का पक्ष रखा, जबकि विष्णु शंकर जैन ने हिंदू पक्ष का पक्ष मजबूती से रखा।
Sambhal Jama Masjid विवाद में क्या है मुद्दा?
Sambhal Jama Masjid का विवाद हिंदू पक्ष के उस दावे से शुरू हुआ है कि इस मस्जिद के निर्माण से पहले यहां हरिहर मंदिर था। उनका कहना है कि यह मंदिर पहले एक प्रमुख धार्मिक स्थल था, जिसे एक मुस्लिम ढांचे में बदल दिया गया। हिंदू पक्ष ने इस मामले को कोर्ट में उठाया और अदालत ने इस पर एक जांच कमेटी गठित की।

सर्वे के दौरान विवाद और उपद्रव
Sambhal Jama Masjid के सर्वे के दौरान 24 नवंबर को जब कोर्ट कमिश्नर की टीम मस्जिद पहुंची, तो वहां भारी बवाल हुआ। इस दौरान पुलिस पर पत्थरबाजी की गई और सर्वे टीम को मस्जिद से बाहर जाने के लिए कहा गया। स्थिति उस समय और भी बिगड़ गई जब उपद्रवियों की भीड़ ने फायरिंग की, जिसके परिणामस्वरूप चार लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने इस मुद्दे को और भी जटिल बना दिया, और अब यह पूरी तरह से राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
ओवैसी और जैन के बीच बहस
सर्वे के मुद्दे पर हुई बहस में असदुद्दीन ओवैसी और विष्णु शंकर जैन के बीच तीखी बहस हुई। ओवैसी ने इस सर्वे को राजनीति से प्रेरित एक कदम बताया और मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का बचाव किया। उनका कहना था कि इस तरह के विवादों को उकसाना देश के शांति और एकता को नुकसान पहुंचाता है। वहीं, विष्णु शंकर जैन ने हिंदू पक्ष का पक्ष लिया और यह बताया कि यह सिर्फ एक कानूनी मामला है, जिसका उद्देश्य पुराने धार्मिक स्थानों को उनका अधिकार दिलाना है।

राजनीतिक रंग में बहस
इस बहस के राजनीतिक असर ने इस मुद्दे को और तूल दे दिया है। शाही जामा मस्जिद के सर्वे ने मुस्लिम और हिंदू दोनों समुदायों के बीच तनाव को बढ़ा दिया है। राजनीतिक नेताओं ने भी इस मामले पर बयान देना शुरू कर दिया है, और इस मुद्दे को लेकर विभिन्न राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट कर रही हैं।
Sambhal Jama Masjid सर्वे के बाद की स्थिति
सर्वे के बाद Sambhal Jama Masjid के मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों में तनाव गहरा गया है। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने यह साफ किया है कि उनका उद्देश्य केवल कानूनी तरीके से इस मसले का समाधान निकालना है। उनका कहना है कि यह मुद्दा धार्मिक स्थानों के अधिकार से जुड़ा है, और वे इसे अदालत के माध्यम से हल करना चाहते हैं। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष ने इसे राजनीतिक चाल करार दिया है। उनका कहना है कि इस विवाद को उकसाने के पीछे राजनीतिक मकसद हो सकता है, जो समाज में तनाव और असहमति को बढ़ावा देने का काम कर रहा है। इस स्थिति में, दोनों पक्षों के बीच संवाद और समझौते की आवश्यकता है ताकि इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकल सके। फिलहाल, यह मामला अदालत में है और इसके परिणाम का इंतजार किया जा रहा है।
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