Mahakumbh भगदड़: शंकराचार्य का योगी पर नया सवाल, ‘कफन पर 64 नंबर लिखा था

By Editor
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Mahakumbh

“Mahakumbh भगदड़ पर शंकराचार्य का योगी सरकार पर हमला, कहा- ‘कफन पर नंबर लिखा था, सरकार ने 18 घंटे तक घटना छिपाई'”

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुए Mahakumbh के दौरान मौनी अमावस्या के दिन मची भगदड़ ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को तीव्र आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भगदड़ पर निशाना साधते हुए योगी सरकार की व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से जो दावा किया गया था, वह पूरी तरह से गलत था और इस त्रासदी को छुपाने के प्रयास ने स्थिति को और जटिल बना दिया।

‘कफन पर लिखा था नंबर’: शंकराचार्य का गंभीर आरोप

Mahakumbh के दौरान हुई भगदड़ के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस घटना को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों ने उन्हें मृतकों के शवों की तस्वीरें दिखाई थीं, जिन पर कफन के ऊपर अलग-अलग नंबर लिखे हुए थे। शंकराचार्य ने बताया कि इनमें से कुछ शवों पर 58, 37, और 64 जैसे नंबर लिखे गए थे, जो यह संकेत दे रहे थे कि कितने लोग इस घटना में मारे गए थे। उन्होंने यह भी बताया कि 1500 लोग अभी भी लापता हैं और उनके परिवार उनके बारे में चिंतित हैं।

’18 घंटे तक मौत के आंकड़े छुपाए गए’: शंकराचार्य की कड़ी आलोचना

Mahakumbh: शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को 18 घंटे तक सार्वजनिक नहीं किया और इसे केवल अफवाहों का हिस्सा बताकर खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह पीड़ादायक था कि इतनी बड़ी घटना को छुपाने की कोशिश की गई। शंकराचार्य के अनुसार, जब यह घटना घटित हुई, तो सरकार की तरफ से कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया और इस त्रासदी को लेकर लोगों को भ्रमित किया गया। उन्होंने कहा, “हमारा सवाल यह नहीं है कि घटना हुई या नहीं, बल्कि घटना को छिपाना सबसे बड़ी पीड़ा बन गई।”

‘सीएम योगी पर किया गया भरोसा, लेकिन धोखा मिला’

Mahakumbh: शंकराचार्य ने यह भी कहा कि इस हादसे के दौरान मीडिया की बजाय उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर विश्वास किया था, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री के पास सबसे सटीक जानकारी होगी। शंकराचार्य ने बताया कि सीएम योगी ने 28 जनवरी की रात को मौनी अमावस्या की बधाई दी थी, और फिर अगले दिन सुबह 8 बजे यह ट्वीट किया कि शांतिपूर्ण स्नान हो रहा है और अफवाहों पर ध्यान न दें। शंकराचार्य का कहना था कि उन्होंने सोचा था कि इस घटना के पीछे किसी साजिश का हाथ हो सकता है, लेकिन बाद में उन्हें यह एहसास हुआ कि सरकार ने उन्हें धोखा दिया।

‘फूल बरसाने का मामला शर्मनाक’: शंकराचार्य की कड़ी प्रतिक्रिया

Mahakumbh में भगदड़ के दिन संगम तट पर फूल बरसाने की घटना पर भी शंकराचार्य ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे शर्मनाक और लज्जाजनक बताया। शंकराचार्य का कहना था कि जिस वक्त हजारों लोग अपनी जान गंवा रहे थे, उस वक्त इस तरह की घटनाओं का होना अपमानजनक था। उन्होंने कहा कि इस घटना को छुपाने और मृतकों के परिवारों को अव्यवस्था की वजह से अपमानित करने की कोशिश की गई।

संगम तट पर घटना के समय की अव्यवस्था पर सवाल

शंकराचार्य ने Mahakumbh के आयोजन के लिए उठाए गए प्रशासनिक दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने पहले दावा किया था कि Mahakumbh में 40 करोड़ लोग आएंगे, लेकिन इस आयोजन के दौरान जो व्यवस्था की गई, वह इतनी नाकाम रही कि 40 करोड़ लोग तो ठीक, बल्कि 10 करोड़ लोगों को भी संभालना मुश्किल हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यवस्था बनाई गई थी, वह 100 करोड़ लोगों के लिए थी, लेकिन 40 करोड़ लोग भी संभाले नहीं गए। इस सवाल ने प्रशासनिक खामियों को उजागर किया और शंकराचार्य ने इसे पूरी तरह से अव्यवस्था करार दिया।

‘गायब लोग और उनका दुख’: शंकराचार्य की चिंता

Mahakumbh: शंकराचार्य ने इस घटना में गायब हुए 1500 लोगों के बारे में भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन लोगों के परिवारों को उनके संबंधियों का कोई पता नहीं चल रहा है, और यह मानसिक पीड़ा उनके लिए बहुत बड़ी समस्या बन गई है। उन्होंने प्रशासन से इन लापता व्यक्तियों के बारे में तत्काल जानकारी देने की मांग की और इसे लेकर सरकार की जिम्मेदारी को बताया।

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