जहाँ एक ओर दुनिया भर में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर कॉलोनियाँ बसाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे पर्यावरण प्रेमी भी हैं जो इस धरती को संवारने और सँभालने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। वे न सिर्फ पेड़ लगा रहे हैं, बल्कि उन बेघर परिंदों के लिए जंगलों का निर्माण कर रहे हैं जिन्हें तथाकथित ‘विकास’ के नाम पर उनका प्राकृतिक घर छीन लिया गया है।
ऐसे ही एक पर्यावरण योद्धा हैं राधाकृष्णन नायर, जो गुजरात के वापी में रहते हैं, लेकिन उनका मिशन पूरे भारत को हराभरा बनाना है। वे जहाँ भी जाते हैं, पेड़ लगाते हैं — और सिर्फ एक-दो नहीं, बल्कि अब तक लाखों पेड़ लगा चुके हैं।
‘Green Hero ऑफ इंडिया’ का सफर
R.K. नायर, जिन्हें ‘Green Hero of India’ के नाम से जाना जाता है, ने Update India के चैनल हेड Sunil Sushila sharma को समंदर किनारे एक मियावकी फॉरेस्ट में बैठ कर दिए विशेष साक्षात्कार में अपने जीवन और इस पर्यावरणीय मिशन के बारे में विस्तार से बताया। उनका मानना है कि “यह पृथ्वी हम सभी की है और इसकी रक्षा की जिम्मेदारी भी हम सभी की है।”
खुद की ज़मीन पर उगाया पहला जंगल
नायर पहले टेक्सटाइल व्यवसाय से जुड़े थे, लेकिन एक दिन उनके जीवन की दिशा ही बदल गई। एक पेड़ की कटाई के बाद उन्होंने एक घायल घोंसले और टूटे अंडों को देखा। पास ही एक चिड़िया व्याकुल होकर चिल्ला रही थी, मानो कह रही हो, “मेरा घर टूट गया, मेरा बच्चा मर गया — तुम कुछ करते क्यों नहीं?”
इस घटना ने उन्हें झकझोर दिया। उस रात उन्हें नींद नहीं आई। अगली सुबह से उन्होंने अपने जीवन को समर्पित कर दिया — उन्होंने अपनी जमीन पर पहला जंगल लगाना शुरू किया।

मियावाकी पद्धति से लगाए घने वन
नायर ने जापान की प्रसिद्ध Miyawaki Method को अपनाया, जिसमें मिट्टी को उपचारित कर पेड़ों को पास-पास लगाया जाता है जिससे कम समय में घना जंगल तैयार हो जाता है। उन्होंने इस तकनीक को भारत की जलवायु और मिट्टी के अनुसार ढाल कर प्रयोग किया।
उन्होंने बताया, “मैंने उन स्थानों पर पेड़ लगाए, जहाँ पौधा उगाना लगभग असंभव था — चाहे वो समुद्र किनारे की खारी मिट्टी हो या कोल प्लांट्स के पास की बंजर ज़मीन।”

प्रकृति से जुड़ाव की अनूठी अनुभूति
नायर कहते हैं, “जब मैं अपने लगाए जंगलों के बीच होता हूँ, तो मुझे लगता है जैसे पेड़ मुझसे बात कर रहे हों। जब चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई देती है, तो ऐसा लगता है जैसे वे अपने घोंसलों से बाहर आकर मुझे धन्यवाद कह रही हों।”
वे मानते हैं कि वही चिड़िया जिसने उन्हें पहली बार जगाया था, आज भी उनकी प्रेरणा बनी हुई है।
महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने भी सराहा
नायर के अद्भुत कार्यों की सराहना आनंद महिंद्रा भी कर चुके हैं। उन्होंने ट्वीट कर लिखा:
“कच्छ का स्मृति वन विश्व का सबसे बड़ा मियावाकी फॉरेस्ट है। इसके लिए R.K. Nair के समर्पण को मेरा सलाम।”
राजस्थान के पाली में नया प्रोजेक्ट
देश भर में 120 से अधिक सघन वन तैयार कर चुके नायर का एक नया प्रोजेक्ट राजस्थान के पाली जिले में शुरू हुआ है। इस परियोजना की शुरुआत भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौर की उपस्थिति में हुई। नायर का विश्वास है:
“अगर हम सभी मिलकर प्रयास करें, तो राजस्थान को भी हराभरा बनाया जा सकता है। यह असंभव नहीं है।”
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