भारत-China के बीच विशेष प्रतिनिधि वार्ता: छह सूत्री सहमति, Kailash-Mansarovar यात्रा की शुरुआत
भारत और China के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच 18 दिसंबर 2024 को विशेष प्रतिनिधि वार्ता हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर छह प्रमुख फैसले किए गए। इन फैसलों में सीमा पर शांति बनाए रखने, रिश्तों के स्वस्थ और स्थिर विकास को बढ़ावा देने, और Kailash-Mansarovar यात्रा के फिर से शुरू होने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।
विशेष प्रतिनिधि वार्ता के प्रमुख निर्णय
भारत-China: यह वार्ता पांच वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित की गई थी और इसमें भारत और चीन के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने सीमा विवाद के समाधान के लिए सकारात्मक कदम उठाने और द्विपक्षीय रिश्तों को बेहतर बनाने पर सहमति जताई। चीन के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी की गई प्रेस रिलीज के अनुसार, दोनों देशों के नेताओं ने सीमा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने और संबंधों के विकास के लिए कदम उठाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
सीमा विवाद पर सकारात्मक पहल
भारत-China: वार्ता में सीमा मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया और दोनों पक्षों ने यह सुनिश्चित किया कि सीमा विवाद का समाधान द्विपक्षीय संबंधों की समग्र स्थिति के परिप्रेक्ष्य में किया जाए, ताकि इससे दोनों देशों के रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्र में प्रबंधन और नियंत्रण नियमों को परिष्कृत करने, विश्वास बहाली उपायों को मजबूत करने और स्थायी शांति और स्थिरता की दिशा में कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की।
Kailash-Mansarovar यात्रा का फिर से शुरू होना
भारत-China: दोनों देशों के बीच हुई इस विशेष प्रतिनिधि वार्ता के दौरान एक महत्वपूर्ण फैसला Kailash-Mansarovar यात्रा को फिर से शुरू करने का था। इसके तहत, भारतीय तीर्थयात्रियों की यात्रा को तिब्बत से होते हुए फिर से शुरू किया जाएगा। कैलाश-मानसरोवर यात्रा भारतीय भक्तों के लिए अत्यधिक महत्व की है, और यह दोनों देशों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगी।
सीमा पार सहयोग और आदान-प्रदान
भारत-China: इसके अलावा, दोनों देशों ने सीमा पार नदी सहयोग और नाथूला सीमा व्यापार को बढ़ावा देने पर भी सहमति व्यक्त की। इन फैसलों से न केवल सीमा पार व्यापार में वृद्धि होगी, बल्कि दोनों देशों के बीच सहयोग और आदान-प्रदान को भी मजबूती मिलेगी। इस सहयोग से क्षेत्रीय शांति और विकास को भी बढ़ावा मिलेगा, जो दोनों देशों के लिए लाभकारी रहेगा।
चीन-भारत संबंधों की दिशा
भारत-China: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने इस वार्ता को चीन-भारत संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के नेताओं ने चीन-भारत संबंधों को रणनीतिक ऊंचाई और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य से देखने पर जोर दिया है। वांग ने यह भी कहा कि चीन-भारत संबंधों को सही दिशा में ले जाने के लिए दोनों देशों के बीच संचित अनुभव महत्वपूर्ण हैं, जिनमें शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांतों का पालन करना और मतभेदों को बातचीत और परामर्श के माध्यम से हल करना शामिल है।
द्विपक्षीय रिश्तों के स्थिर विकास की दिशा
भारत-China: वांग ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को सीमा मुद्दे को द्विपक्षीय संबंधों में उचित स्थान देना चाहिए और सीमा क्षेत्र में संयुक्त रूप से शांति बनाए रखना चाहिए। उनका मानना था कि इस तरह के प्रयासों से चीन-भारत संबंधों को जल्द ही स्वस्थ और स्थिर विकास की दिशा में बढ़ावा मिलेगा।
डोभाल और चीन के उपराष्ट्रपति से मुलाकात
भारत-China: वार्ता के बाद, अजीत डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की। हान ने कहा कि चीन और भारत, जो प्राचीन सभ्यताएँ और उभरती प्रमुख शक्तियाँ हैं, स्वतंत्रता, एकजुटता और सहयोग पर कायम हैं। उनका मानना है कि इन दोनों देशों का सहयोग वैश्विक प्रभाव और रणनीतिक महत्व रखता है। डोभाल की यह मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक बदलाव का संकेत देती है।
सीमा पर सैन्य गतिरोध के बाद का पहला ठोस कदम
भारत-China: यह विशेष प्रतिनिधि वार्ता पिछले चार वर्षों के सैन्य गतिरोध के बाद पहली ठोस बातचीत थी। 2020 में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शुरू हुआ सैन्य गतिरोध और गलवान घाटी में हुई झड़पों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आ गया था। लेकिन इस वार्ता के बाद, दोनों देशों ने समझौता किया कि सीमा विवाद का समाधान और शांति बनाए रखने के लिए सहयोग की दिशा में काम किया जाएगा। यह समझौता 21 अक्टूबर 2024 को सैनिकों के पीछे हटने और गश्त पर समझौते के बाद हुआ था।
भविष्य में द्विपक्षीय वार्ता की योजना
भारत-China: इस विशेष प्रतिनिधि वार्ता के दौरान यह भी तय किया गया कि भविष्य में दोनों देशों के बीच और बातचीत जारी रहेगी। दोनों पक्षों ने अगले वर्ष भारत में एक नई विशेष प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित करने पर सहमति जताई और इसके लिए समय का निर्धारण राजनयिक माध्यमों से किया जाएगा।
समग्र स्थिति और वैश्विक संदर्भ
भारत-China: इस वार्ता में दोनों देशों ने द्विपक्षीय, अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर गहन विचारों का आदान-प्रदान किया। चीन और भारत के नेताओं ने वैश्विक और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए स्थिर और अच्छे रिश्तों को महत्व दिया, जो न केवल इन दोनों देशों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।