नवीन कानूनों से नागरिकों को मिलेगा शीघ्र न्याय, ‘जीरो एफआईआर’ और बच्चों व महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष प्रावधान
भीलवाड़ा: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जयपुर एग्जीबिशन एंड कंवेंशन सेंटर (JECC) में नए आपराधिक कानूनों पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण आसींद कस्बे के पंचायत समिति सभागार में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुलिस उपाधीक्षक ओमप्रकाश सोलंकी, सीएलजी सदस्य, समाजसेवी, अधिवक्ता और अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
वीसी के माध्यम से अमित शाह ने कहा कि ये नए कानून न केवल अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने में मदद करेंगे, बल्कि पीड़ितों को भी तेजी से न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे। उन्होंने बताया कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम पुराने औपनिवेशिक कानूनों को समाप्त करते हुए भारतीय संसद द्वारा बनाये गए हैं।
नए कानूनों के मुख्य प्रावधान:
- जीरो एफआईआर: अब किसी भी व्यक्ति को किसी भी पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने का अधिकार होगा, भले ही अपराध उसके क्षेत्र में न हुआ हो।
- गिरफ्तारी में सूचना का अधिकार: गिरफ्तारी होने पर व्यक्ति अपनी पसंद के किसी व्यक्ति को अपनी स्थिति के बारे में सूचित कर सकता है।
- तत्काल न्याय: मुकदमा पूरा होने के 45 दिनों के भीतर फैसला और 60 दिनों के भीतर आरोप तय होंगे।
- दुष्कर्म पीड़िताओं का सुरक्षा प्रावधान: महिला पुलिस अधिकारी पीड़ित का बयान उसके अभिभावक या रिश्तेदार की मौजूदगी में दर्ज करेगी और मेडिकल रिपोर्ट सात दिन के भीतर तैयार होगी।
- संगठित अपराध और आतंकवाद पर नियंत्रण: संगठित अपराधों और आतंकवाद की नई परिभाषाएं।
- देशद्रोह: राजद्रोह की जगह देशद्रोह का प्रावधान।
- जघन्य अपराधों की वीडियोग्राफी: जघन्य अपराधों के वारदात स्थल की अनिवार्य वीडियोग्राफी।
- मॉब लिंचिंग: फांसी की सजा का प्रावधान।
- महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध: बच्चों को खरीदना-बेचना जघन्य अपराध, नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म में मृत्युदंड या उम्रकैद का प्रावधान।
पुलिस विभाग ने कार्यक्रम में नए कानूनों से संबंधित जानकारी पुस्तिकाएं वितरित कीं। इस आयोजन का उद्देश्य हर नागरिक तक न्याय और सुरक्षा का संदेश पहुँचाना है, ताकि भारत एक सशक्त, सुरक्षित और पारदर्शी न्याय व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ सके।