पश्चिम बंगाल के मतुआ बहुल इलाकों में SIR प्रक्रिया से दहशत का माहौल। हजारों वोटर प्रभावित, BJP और TMC दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ीं।
पश्चिम बंगाल के मतुआ समुदाय में इन दिनों भारी दहशत और असमंजस का माहौल है। राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR – Special Intensive Revision) प्रक्रिया शुरू होने के बाद हजारों मतुआ वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटने की आशंका बढ़ गई है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से उत्तर 24 परगना, नदिया और दक्षिण 24 परगना जिलों में चलाई जा रही है, जहां मतुआ समुदाय की जनसंख्या सबसे अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार, जिन लोगों के नाम 2002 की मतदाता सूची में नहीं हैं, उन्हें अब नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज जमा करने होंगे। इससे कई मतुआ परिवारों में डर फैल गया है क्योंकि उनके पास पर्याप्त नागरिकता प्रमाण नहीं हैं।
राजनीतिक तौर पर यह मुद्दा भाजपा (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) दोनों के लिए सिरदर्द बन गया है। भाजपा का कहना है कि हिंदू शरणार्थियों को CAA (नागरिकता संशोधन कानून) के तहत संरक्षण मिलेगा, जबकि TMC का आरोप है कि यह प्रक्रिया जानबूझकर मतुआ वोटरों को डराने के लिए की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटे, तो आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में दोनों प्रमुख दलों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है।