राजस्थान में पंचायती राज चुनावों को लेकर चल रहे कानूनी गतिरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि राज्य की लोकतांत्रिक गतिविधियों की न्यायिक समीक्षा से परहेज़ किया जाना चाहिए। इस फैसले के बाद 15 अप्रैल तक चुनाव संपन्न कराने का रास्ता साफ हो गया है।
हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने जय सिंह द्वारा दायर SLP को खारिज करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के 21 जनवरी 2026 के फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने डी.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 792/2026 को खारिज करते हुए राज्य सरकार द्वारा जारी परिसीमन अधिसूचनाओं की वैधता को सही ठहराया था।
क्या थीं याचिकाकर्ता की दलीलें?
याचिकाकर्ता का आरोप था कि राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत परिसीमन अधिसूचना जारी करते समय अनिवार्य कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। मुख्यालय की दूरी और ग्रामीणों की असुविधा से जुड़ी आपत्तियों पर समुचित विचार नहीं हुआ। ग्राम पंचायत मुख्यालय के स्थानांतरण का फैसला मनमाना बताया गया।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
मामला ग्राम पंचायत सिल्लारपुरी के पुनर्गठन से जुड़ा था। पहले इसमें सिल्लारपुरी (जनसंख्या 1254), खानी डांगियां (364) और रायपुर जाटान (1700) राजस्व ग्राम शामिल थे। मंत्रिस्तरीय उपसमिति ने आमजन और जनप्रतिनिधियों की राय के आधार पर सर्वाधिक आबादी वाले राजस्व ग्राम रायपुर जाटान में मुख्यालय स्थानांतरित करने की सिफारिश की। इसके बाद 28 दिसंबर को संशोधित अधिसूचना संख्या 878 जारी कर ग्राम पंचायत रायपुर जाटान का प्रकाशन किया गया।
क्या है असर?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजस्थान में पंचायती राज चुनावों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में कोई कानूनी बाधा नहीं रही। अब राज्य सरकार 15 अप्रैल तक चुनाव संपन्न कराने की दिशा में कदम तेज कर सकेगी।
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