राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के मॉडल पिपलांत्री जैसा गांव हर तहसील में होना चाहिए और इस मॉडल को जन-जन तक पहुंचाया जाना चाहिए। वे पर्यावरण संरक्षण के मॉडल ग्राम पिपलांत्री में आयोजित पर्यावरण महोत्सव-2025 में शामिल हुए, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं अपनी नन्हीं बच्चियों के साथ मौजूद थीं। उन्होंने बच्चियों को दुलार किया और उन्हें आशीर्वाद दिया।
बागडे ने कहा कि पिपलांत्री में चारों ओर हरियाली दिखती है, जो श्याम सुंदर पालीवाल, अनीता पालीवाल और ग्रामीणों के समर्पण और पर्यावरण प्रेम का परिणाम है। यहां ग्रामीणों ने न केवल पौधे लगाए, बल्कि उन्हें जीवित भी रखा, जिसका नतीजा है कि आज चारों ओर वृक्ष ही वृक्ष नजर आते हैं। बेटियों के जन्म पर 111 पौधे लगाने की परंपरा एक अद्वितीय मिसाल है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में भूमि की कोई कमी नहीं है, बस इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने बिश्नोई समाज के बलिदान को याद किया, जिन्होंने वृक्षों की रक्षा के लिए जान की बाजी लगा दी थी। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि बेटियों की शिक्षा में कोई कमी न रखें, क्योंकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही गरीबी से बाहर निकलने का एक सशक्त साधन है।
श्याम सुंदर पालीवाल ने बताया कि पिपलांत्री में अब तक 14 से 15 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं, जिनमें एक लाख चंदन के वृक्ष हैं। कभी यह क्षेत्र जल संकट से जूझता था, लेकिन जल संरक्षण के प्रयासों से अब यहां का भूजल स्तर ऊपर आ गया है और पानी की समस्या दूर हो गई है। यह ग्रामीणों और भामाशाहों के सहयोग से संभव हुआ।
उन्होंने बताया कि अब गांव में तालाब और कुएं लबालब हैं, पलायन रुक गया है, लोगों को गांव में ही रोजगार मिल रहा है। पिपलांत्री अब इको टूरिज्म का केंद्र बन गया है और यहां डेयरी उद्योग भी फल-फूल रहा है। कार्यक्रम में बच्चियों ने बागडे की कलाई पर राखी बांधी और उन्होंने पीपल का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।