प्रदेश सरकार कल्याणकारी योजनाओं को वास्तविक हकदारों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी क्रम में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना के लाभार्थियों के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण (ई-केवाईसी) का प्रावधान लागू किया है।
योजना का लाभ असली हकदारों तक पहुंचाने के लिए आधार आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) लाभार्थियों की सटीक पहचान, वास्तविक समय और लागत की प्रभावी गणना, प्रमाणीकरण और डुप्लीकेशन रोकने में अहम भूमिका निभाता है। आधार प्रमाणीकरण के विभिन्न तरीकों में बायोमेट्रिक (चेहरा, उंगली, आंख की पुतली) प्रमाणीकरण सबसे सुरक्षित और विश्वसनीय साबित हुआ है। यह योजना के दुरुपयोग को रोकने और सब्सिडी को इच्छित प्राप्तकर्ताओं तक पहुंचाने में मदद करता है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग लगातार मुख्यमंत्री रसोई गैस सब्सिडी योजना के अंतर्गत एलपीजी रिफिल प्राप्त करने वाले सभी पात्र लाभार्थियों को बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण करवाने हेतु प्रोत्साहित कर रहा है। लाभार्थी यह प्रक्रिया कई सुविधाजनक तरीकों से पूरी कर सकते हैं, जैसे—तेल विपणन कंपनियों (ओएमसीएस) के मोबाइल ऐप से स्व-प्रमाणीकरण, अथवा एलपीजी वितरक के अधिकृत डिलीवरी कर्मियों से घर पर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण करवाना।
वैकल्पिक रूप से, लाभार्थी अपने आधार कार्ड और घरेलू गैस उपभोक्ता कार्ड (डीजीसीसी) या नवीनतम रिफिल कैश मेमो के साथ व्यक्तिगत रूप से अपने एलपीजी वितरक के पास जाकर भी प्रमाणीकरण प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।