एक तरफ जहां देश को ‘डबल इंजन’ की रफ्तार से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ इसी देश में बच्चों के भविष्य और उनकी सुरक्षा के साथ खुलेआम खिलवाड़ की तस्वीरें सामने आती रहती हैं।ऐसा ही एक मामला दरभंगा स्कूल से सामने आया है आए दिन स्कूल और कॉलेजों से जुड़ी ऐसी खबरें सामने आती हैं, जहां कभी मिड-डे मील की गुणवत्ता, कभी पीने के पानी की समस्या, तो कभी शिक्षकों की लापरवाही और गंभीर अनियमितताओं के मामले सामने आते हैं।

अब ऐसा ही एक ताजा मामला बिहार के दरभंगा से सामने आया है, जहां स्कूल की एक तस्वीर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।तस्वीर में स्कूल की इमारत का साइड पिलर टूट चुका है, लेकिन उसकी मरम्मत कराने के बजाय उसी कमजोर हिस्से के नीचे बच्चों के बैठने के लिए बेंच लगा दी गई है।
जरा सोचिए…
अगर वह बेंच खिसक जाए?
अगर कमजोर हिस्सा अचानक टूट जाए?
और अगर उसके नीचे बैठा कोई बच्चा इसकी चपेट में आ जाए?तब जिम्मेदारी किसकी होगी?
यह सिर्फ एक टूटे हुए पिलर या जर्जर इमारत का मामला नहीं है।यह सवाल है उन बच्चों की सुरक्षा का, जो स्कूल में अपना भविष्य बनाने के लिए आते हैं सरकारें विकास और नई इमारतों के निर्माण के बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन सवाल यह है कि जो स्कूल पहले से मौजूद हैं, उनकी सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर कितना ध्यान दिया जा रहा है? क्योंकि स्कूल सिर्फ एक इमारत नहीं होता।यही वो जगह है जहां देश का भविष्य तैयार होता है।
तो सवाल सीधा है—
आखिर सरकारें अपने लिए सुविधाएं और इमारतें बनाने से पहले उन स्कूलों पर कब ध्यान देंगी, जहां देश के भविष्य की नींव रखी जा रही है?