उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1947 के विभाजन को कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति का काला अध्याय बताया और कहा कि इस त्रासदी ने सनातन भारत की एकता को तोड़कर पूरे देश को पीड़ा दी। उन्होंने कहा कि 14 अगस्त 1947 की विभाजन विभीषिका को याद करते हुए आज पूरा देश शोकाकुल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2021 में इस दिन को स्मृति दिवस घोषित कर इतिहास को जीवंत किया। मुख्यमंत्री ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और देशवासियों से इतिहास से सबक लेने का आह्वान किया। प्रदर्शनी में विभाजन के बाद की हिंसा और प्रभावित लोगों से जुड़ी डिजिटल आर्काइव फोटो, अखबार कतरनें, अभिलेख और विस्थापित परिवारों की सामग्री प्रदर्शित की गई, जिससे युवाओं को उस दौर की वेदना से अवगत कराया गया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वतंत्रता के लिए क्रांतिकारियों ने अपने प्राण न्यौछावर किए, लेकिन कांग्रेस ने सत्ता के लालच में देश का बंटवारा कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि लाहौर, कराची, रावलपिंडी, मुल्तान जैसे क्षेत्रों को हिंदू, सिख और बौद्ध विहीन बनाने का अभियान कांग्रेस की नीतियों का नतीजा था। इस हिंसा में 15-20 लाख लोगों की मौत हुई और करोड़ों विस्थापित हुए। उन्होंने कहा कि विस्थापितों के लिए तत्कालीन सरकार ने न स्मारक बनाए और न संग्रहालय स्थापित किए, बल्कि उनकी पीड़ा को भुला दिया।
इसके विपरीत, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की, जिन्होंने सीएए के माध्यम से शरणार्थियों को नागरिकता और पुनर्वास का अधिकार दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार जम्मू-कश्मीर और अन्य क्षेत्रों में शरणार्थियों को सीएए के तहत नागरिकता मिली और ये लोग भारत के विकास में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी और घोषणा की कि उत्तर प्रदेश सरकार पात्र परिवारों को जमीन के पट्टे और पुनर्वास देगी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी के माध्यम से युवाओं को विभाजन की त्रासदी, दंगे, विस्थापन और कत्लेआम के इतिहास से जोड़ना जरूरी है। इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।