दिल्ली चुनाव परिणाम से पहले Arvind Kejriwal की चिंता: विधायकों की खरीद-फरोख्त को लेकर बैठक बुलाई
दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने अपनी पार्टी के सभी 70 उम्मीदवारों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में चुनाव परिणाम के दिन की तैयारियों और विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों पर चर्चा की जाएगी। Arvind Kejriwal ने बीजेपी पर आरोप लगाए हैं कि वह आप के विधायकों और उम्मीदवारों को 15 करोड़ रुपये का लालच दे रहे हैं। उनके मुताबिक, यह सब एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है, जिससे उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को तोड़ा जा सके।
Arvind Kejriwal का बयान: “हमारा एक भी आदमी नहीं टूटेगा”
Arvind Kejriwal ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हाल ही में कई ऐसे सर्वे दिखाए गए हैं, जिनमें यह दावा किया जा रहा है कि गाली गलौज पार्टी (बीजेपी) को 55 से अधिक सीटें मिल रही हैं। लेकिन केजरीवाल ने सवाल उठाया कि अगर बीजेपी को इतनी बड़ी जीत मिल रही है, तो उनके उम्मीदवारों को फोन करने की आवश्यकता क्यों महसूस हो रही है? केजरीवाल का कहना था कि बीजेपी के लोग आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों को यह कह कर लालच दे रहे हैं कि वह उन्हें मंत्री बना देंगे और हर एक को 15-15 करोड़ रुपये देंगे।
Arvind Kejriwal ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह के आरोप एक फर्जी साजिश का हिस्सा हैं। उनका दावा है कि यह सर्वे किसी खास मकसद से करवाए गए हैं ताकि कुछ उम्मीदवारों को तोड़कर उनकी पार्टी की संख्या कम की जा सके। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि “हमारा एक भी आदमी नहीं टूटेगा”, और उनकी पार्टी पूरी मजबूती से चुनाव परिणाम का सामना करेगी।
दिल्ली की सीएम आतिशी का बयान: “एग्जिट पोल एक साजिश है”
दिल्ली की मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी की सीनियर नेता आतिशी ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि अगर बीजेपी को 50 से ज्यादा सीटें मिल रही हैं, तो फिर उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को संपर्क कर के क्यों तोड़ा जा रहा है? आतिशी का कहना था कि यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि एग्जिट पोल एक साजिश के तहत किए गए हैं, और इसका मकसद सिर्फ आम आदमी पार्टी के विधायकों को तोड़ना है।
उन्होंने इस दौरान सुल्तानपुर माजरा से आप के उम्मीदवार और दिल्ली सरकार के मंत्री मुकेश अहलावत का एक पोस्ट भी री-पोस्ट किया। पोस्ट में मुकेश अहलावत ने बताया कि उन्हें एक कॉल आया था, जिसमें कहा गया कि बीजेपी की सरकार बनने वाली है, और उन्हें मंत्री बना दिया जाएगा, साथ ही 15 करोड़ रुपये भी दिए जाएंगे, अगर वह आप पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो जाएं।
मुकेश अहलावत ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि वह “मर जाएंगे, लेकिन कभी Arvind Kejriwal का साथ नहीं छोड़ेंगे।” उनका यह बयान साफ करता है कि वह किसी भी तरह के लालच में आकर अपनी पार्टी और Arvind Kejriwal का साथ नहीं छोड़ेंगे।
बीजेपी पर आरोप: विधायकों को तोड़ने की साजिश
Arvind Kejriwal और आतिशी के बयान से यह साफ होता है कि आम आदमी पार्टी के नेताओं का मानना है कि बीजेपी चुनाव परिणाम के पहले से ही विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। इस पर केजरीवाल ने कहा कि बीजेपी यह सब इसलिए कर रही है ताकि उनकी पार्टी के उम्मीदवारों और विधायकों में असमंजस पैदा किया जा सके और उनकी सीटों की संख्या कम हो सके।
वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें पूरा भरोसा है कि आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार किसी भी तरह के दबाव या लालच में नहीं आएंगे। उनका कहना था कि पार्टी के उम्मीदवार पूरी निष्ठा के साथ केजरीवाल और उनकी पार्टी के साथ खड़े हैं और आगामी चुनाव परिणाम में यह स्पष्ट हो जाएगा।
पार्टी की तैयारियों पर जोर
इस बीच, आम आदमी पार्टी की बैठक में Arvind Kejriwal ने अपने उम्मीदवारों से न केवल चुनाव नतीजों की तैयारियों पर चर्चा की, बल्कि उनके मनोबल को भी बढ़ाया। उन्होंने कहा कि चाहे जो भी स्थिति हो, उनकी पार्टी पूरी तरह से एकजुट है और चुनाव परिणाम के दिन किसी भी दबाव का सामना करने के लिए तैयार है।
पार्टी के सभी 70 उम्मीदवारों को यह संदेश दिया गया कि वे किसी भी बाहरी दबाव से प्रभावित न हों और अपने वचनबद्धता को बनाए रखें। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि चुनाव परिणाम के बाद पार्टी की आगे की रणनीति क्या होगी और वे कैसे उन चुनौतियों का सामना करेंगे जो नतीजों के बाद आ सकती हैं।
सुरक्षा और सतर्कता की आवश्यकता
इस मामले ने यह भी दिखाया कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गरमाया हुआ है। विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों ने न केवल आम आदमी पार्टी, बल्कि चुनाव के बाकी दलों को भी सतर्क कर दिया है। Arvind Kejriwal और उनकी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए यह जरूरी होगा कि वे किसी भी तरह के दबाव या लालच से बचें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनाव परिणाम का सामना करें।
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