मुख्यमंत्री डॉ. Mohan Yadav ने गुरु गोबिंद सिंह जी की जीवन यात्रा को बताया प्रेरणादायी, साहिबजादों के बलिदान को शालेय पाठ्यक्रम में शामिल करने का किया ऐलान
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. Mohan Yadav ने गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर उनकी महानता और बलिदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश और धर्म के गौरव की रक्षा के लिए अपने परिवार और चार साहिबजादों की कुर्बानी दी। यह बलिदान पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है। डॉ. Mohan Yadav गुरूद्वारा हमीदिया रोड में मत्था टेकने के बाद उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उनके शब्दों में गुरु गोबिंद सिंह जी का योगदान और उनकी जीवन यात्रा सभी के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है।
गुरु गोबिंद सिंह जी की शहादत और बलिदान
डॉ. Mohan Yadav ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी की जीवन यात्रा में एक महत्वपूर्ण अध्याय उनके परिवार और बच्चों की शहादत से जुड़ा हुआ है। उन्होंने अपने परिवार के छोटे-छोटे बच्चों को भी देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए बलिदान देने की प्रेरणा दी। यह बलिदान राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण और श्रद्धा का अद्वितीय उदाहरण है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने साहस और शक्ति से न केवल अपने परिवार को बलिदान दिया, बल्कि समग्र देश और संस्कृति की रक्षा के लिए भी हथियार उठाए और शत्रुओं से लड़ा।
गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की, जो कि धर्म, संस्कृति और सम्मान की रक्षा करने का एक मजबूत रूप था। डॉ. Mohan Yadav ने कहा कि खालसा पंथ ने यह सिद्ध किया कि देश और संस्कृति की रक्षा के लिए बहादुरी से संघर्ष करना आवश्यक है। यह उनका अद्वितीय योगदान था, जिसने समूचे विश्व में धर्म, संस्कृति और स्वतंत्रता की नई परिभाषा स्थापित की।
गुरू गोबिंद सिंह जी के योगदान को राष्ट्रीय पहचान
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन के संघर्ष और बलिदान को हर समय और हर युग में याद रखा जाएगा। उनकी शहादत और उनकी शिक्षाओं का प्रभाव न केवल भारत में, बल्कि विश्वभर में महसूस किया गया है। यह उनकी दूरदृष्टि और संघर्ष का परिणाम था कि उन्होंने धर्म और संस्कृति को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया और शहीदी दी। उनके संघर्ष और बलिदान को आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर बना दिया गया है।
गुरु ग्रंथ साहब की एकता और आध्यात्मिकता
डॉ. Mohan Yadav ने यह भी बताया कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने न केवल शारीरिक बलिदान दिया, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी वे अत्यंत गहरे थे। उन्होंने सभी गुरूओं के पवित्र वचनों को एकत्रित कर गुरु ग्रंथ साहब को पंथ का मार्गदर्शक स्वरूप प्रदान किया। यह उनके धार्मिक ज्ञान और महान कार्य का प्रतीक था।
साहिबजादों के बलिदान को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय
Mohan Yadav ने यह घोषणा की कि साहिबजादों के बलिदान को अब शालेय पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा, ताकि बच्चे इस महान योगदान और शहादत के बारे में जान सकें और उन्हें प्रेरणा मिल सके। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीर बाल दिवस मनाने का निर्णय लिया है, जो कि 26 दिसंबर को साहिबजादों की शहादत को समर्पित है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य आगामी पीढ़ी को उनकी वीरता और बलिदान के बारे में जागरूक करना है।
ननकाना साहिब कॉरीडोर और अन्य सौगातें
मुख्यमंत्री डॉ. Mohan Yadav ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ननकाना साहिब कॉरीडोर सहित कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जो समाज और सिख समुदाय के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रहे हैं। इन प्रयासों से सिख समुदाय को अपनी धार्मिक धरोहर से जुड़ने का एक अवसर मिला है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी पर्व सहित अन्य आयोजनों में पूरी तरह से सहयोग करेगी।
सम्मान समारोह और सेवा कार्य
Mohan Yadav ने वीर बाल दिवस के अवसर पर गुरूद्वारा हमीदिया रोड में सेवाएं देने वाले बच्चों का सम्मान किया। उन्होंने उन बच्चों को सम्मानित किया जिन्होंने गुरूद्वारे की व्यवस्थाओं को संभालने में मदद की। यह सम्मान समारोह एक महत्वपूर्ण कदम था, जिससे बच्चों को उनके सेवा कार्य के लिए प्रोत्साहन मिला। मुख्यमंत्री ने बच्चों को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही, उन्होंने गुरूद्वारे में सेवा कार्य भी किया और वहां उपस्थित जनसमुदाय का अभिवादन किया।
इस अवसर पर सुश्री नेहा बग्गा का भी सम्मान किया गया, जो कि इस आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही थीं। यह सम्मान समारोह ना केवल गुरु गोबिंद सिंह जी के योगदान को याद करने का अवसर था, बल्कि यह भी दर्शाता है कि राज्य सरकार समाज में सेवा और समर्पण के मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
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