जयपुर जिले के चौमूं कस्बे में मस्जिद विवाद के दौरान हुए पथराव के मामले में पुलिस ने करीब 100 लोगों को हिरासत में लिया है। जयपुर के पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने बताया कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी या जिनके हिंसा में शामिल होने के सबूत मिलेंगे, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि, “हर व्यक्ति की भूमिका के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किसे गिरफ्तार किया जाए और किसे पाबंद किया जाए। फिलहाल किसी भी तरह की साजिश के संकेत सामने नहीं आए हैं और न ही बाहरी लोगों की संलिप्तता की पुष्टि हुई है। उन्होंने आगे बताया कि अब तक की जांच में सामने आया है कि यह घटना गलतफहमी, डर या भ्रम के कारण हुई। घरों की छतों पर ईंट-पत्थर इकट्ठा किए जाने की बात को उन्होंने गलत बताया। पुलिस के अनुसार, पुराने मकानों की छतों पर सामान्य रूप से कुछ ईंट-पत्थर रखे होते हैं। अभी तक इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने यह भी कहा कि पुलिस अब अपनी ओर से इस मामले में केस दर्ज करेगी। हालात को सामान्य करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग समय पर अधिकारियों की तैनाती की जा रही है। स्थानीय स्तर पर किसी लापरवाही की भूमिका सामने आती है तो जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि यह घटना जयपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर चौमूं कस्बे में बस स्टैंड क्षेत्र के पास तड़के करीब 3 बजे हुई। प्रशासन द्वारा मस्जिद के बाहर सड़क किनारे अतिक्रमण कर लगाई गई लोहे की रेलिंग हटाने की कार्रवाई के दौरान भीड़ ने पथराव कर दिया, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए। रेलिंग हटाने की कोशिश के दौरान ही हालात तनावपूर्ण हो गए। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के स्पष्ट और सख्त निर्देशों के बाद चौमूं में उपद्रव फैलाने वाले शरारती तत्वों के खिलाफ पुलिस ने त्वरित और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया है कि राजस्थान में कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के लिए कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। पत्थरबाजी करने वालों को कानून के मुताबिक कार्रवाई करते हुए सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।