राजस्थान का पेपर लीक कांड एक बार फिर सुर्खियों में है। वजह है RPSC के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा का बड़ा खुलासा, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। जिन नेताओं के नाम सामने आए हैं, उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का करीबी बताया जा रहा है, इसलिए मामला और भी गंभीर हो गया है।

यह राजस्थान के सबसे बड़े भर्ती घोटालों में से एक माना जा रहा है, जिसमें हजारों मेहनती युवाओं का भविष्य दांव पर लगा। सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले छात्र आज भी इस घोटाले की कीमत चुका रहे हैं। SOG और ED की पूछताछ में बाबूलाल कटारा ने कबूल किया कि RPSC सदस्य बनने के लिए 1.2 करोड़ रुपये की डील हुई थी। इसमें से 40 लाख रुपये उन्होंने दो किश्तों में डूंगरपुर जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष दिनेश खोड़निया को दिए। आरोप है कि RAS, एग्रीकल्चर ऑफिसर और कॉलेज लेक्चरर जैसी भर्तियों में इंटरव्यू के बदले पैसे वसूले गए। जांच एजेंसियों के मुताबिक, पेपर 60 लाख रुपये में लीक किए गए। SI भर्ती परीक्षा 2021 का पेपर भी कटारा के नेटवर्क के जरिए बाहर गया। अब तक इस मामले में 113 से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें कटारा की बेटी, भतीजा और अन्य करीबी रिश्तेदार भी शामिल हैं। इतना ही नहीं, RPSC के एक और सदस्य रामू राम रायका की गिरफ्तारी हो चुकी है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कटारा की सदस्यता समाप्त करने पर भी सहमति दे दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या यह सब सिर्फ एक बाबूलाल कटारा का खेल था?
या फिर इसके तार ऊपर तक जुड़े हैं?
क्या सदस्य बनाने के लिए लिया गया पैसा यहीं रुका, या पार्टी और बड़े नेताओं तक भी पहुंचा?
और जिन लोगों ने सिफारिश की, क्या वे पूरी तरह पाक-साफ हैं?
एक बात साफ है—यह मामला सिर्फ पेपर लीक का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में फैली गंदगी को उजागर करता है। जांच अभी जारी है और जनता की मांग है कि सिर्फ नाम नहीं, बल्कि पूरा सच सामने आए और दोषियों को सख्त सजा मिले।