Sensex-Nifty में गिरावट, तीन बड़े कारणों से शेयर बाजार में मच गई हलचल
18 दिसंबर 2024 को भारतीय शेयर बाजार में तीसरे दिन भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा। बीते कुछ दिनों से बियर गैंग (शेयर बाजार में मंदी के रुझान) हावी है, जिसके कारण Sensex-Nifty में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। दिन के कारोबार के दौरान सेंसेक्स में 600 अंकों से अधिक की गिरावट आई और यह 60,000 के स्तर से नीचे चला गया। वहीं, निफ्टी भी 186 अंक गिरकर 24,150 के आसपास पहुंच गया।
शेयर बाजार की मार्केट वैल्यू में 2 लाख करोड़ रुपये की कमी
Sensex-Nifty: इस गिरावट का असर न केवल प्रमुख इंडेक्स पर पड़ा, बल्कि बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) में लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। खासतौर पर बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में आधे फीसदी से अधिक की गिरावट देखी गई।
इन सेक्टर्स में दिखी सबसे ज्यादा गिरावट
Sensex-Nifty: विशेष रूप से यूटिलिटी, बैकिंग, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मेटल्स के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। निवेशकों में इस गिरावट के कारण चिंता का माहौल बन गया और वे अपने निवेश को सुरक्षित रखने के लिए सतर्क हो गए।
तीन बड़े कारणों ने बढ़ाया बाजार की चिंता
इस गिरावट के पीछे तीन मुख्य कारण सामने आए हैं, जिन्होंने निवेशकों के मन में डर और अनिश्चितता पैदा की है।
1. ट्रंप का भारत पर जवाबी टैक्स लगाने का बयान
Sensex-Nifty: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर जवाबी टैक्स लगाने की धमकी दी है। ट्रंप ने कहा है कि अगर भारत अमेरिकी उत्पादों पर भारी टैक्स लगाता है, तो अमेरिका भारतीय उत्पादों पर भी उतना ही टैक्स लगाएगा। इस बयान से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में और तनाव बढ़ने का अंदेशा है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए नुकसानकारी साबित हो सकता है। इस व्यापारिक तनाव से भारत के निर्यातकों की लागत बढ़ सकती है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। ट्रंप के इस बयान का बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा, जिससे सेंटीमेंट कमजोर हो गए।
2. FIIs की बिकवाली और अमेरिकी बाजारों की बेहतर प्रदर्शन
Sensex-Nifty: भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन हाल के समय में अमेरिकी बाजारों की तुलना में कमजोर रहा है, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली में वृद्धि हुई है। अमेरिका के S&P 500 इंडेक्स में 2024 के दौरान अब तक 27.5% की बढ़त देखने को मिली है, जबकि निफ्टी में केवल 12% का इजाफा हुआ है। इस अंतर से FIIs के लिए भारतीय बाजार कम आकर्षक हो गए हैं, जिससे वे अपनी पूंजी वापस अमेरिका में स्थानांतरित कर रहे हैं। इससे भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ गया है।
विजयकुमार, एक बाजार विश्लेषक, ने कहा कि अमेरिकी और भारतीय अर्थव्यवस्थाओं के बीच मौजूदा असंतुलन को देखते हुए यह अंतर आगे भी बना रह सकता है। भारतीय अर्थव्यवस्था की चुनौतियां और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती इस अंतर को और बढ़ा सकती हैं। इसका असर बाजार पर लंबे समय तक जारी रह सकता है।
3. फेडरल रिजर्व की बैठक के नतीजों पर ध्यान
Sensex-Nifty: शेयर बाजार के निवेशक इस समय अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के नतीजों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। यह बैठक 18 दिसंबर को समाप्त हुई और इसके परिणाम आज देर शाम आने की उम्मीद है। बाजारों का अनुमान है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है। लेकिन निवेशकों की सबसे ज्यादा चिंता फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल के बयान से जुड़ी हुई है, जिसमें वे भविष्य में ब्याज दरों को लेकर अपने दृष्टिकोण का संकेत दे सकते हैं।
HDFC सिक्योरिटीज के देवर्ष वकील ने बताया कि वैश्विक बाजारों में यह चिंता है कि फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों में कटौती की रफ्तार में ठहराव या मंदी का संकेत दे सकता है। ऐसे में निवेशक बहुत सतर्क हैं और बाजार में किसी भी प्रकार की अनिश्चितता को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
निवेशकों का सेंटिमेंट और भविष्य का रुझान
Sensex-Nifty: इन तीन बड़े कारणों के चलते भारतीय शेयर बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। ट्रंप के बयान, अमेरिकी बाजारों में बेहतर प्रदर्शन और फेडरल रिजर्व की संभावित निर्णयों के कारण निवेशक सतर्क हो गए हैं। हालांकि, कुछ बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है और भविष्य में बाजार स्थिर हो सकता है, लेकिन फिलहाल निवेशकों को जोखिमों के प्रति सतर्क रहना होगा।