जयपुर, 14 फरवरी। देश में रेल नेटवर्क और क्षेत्रीय संपर्क मजबूत करने के लिए भारतीय रेल ने राजस्थान सहित अन्य राज्यों में विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनका लक्ष्य परिचालन दक्षता और यात्री सुरक्षा बढ़ाना, यात्रा समय में कमी लाना और आम लोगों को सुगमता प्रदान करना है। इससे आर्थिक विकास और महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर सुचारू आवागमन सुनिश्चित होगा।
उत्तर पश्चिम रेलवे के अंतर्गत राजस्थान में रींगस-सीकर रेलखंड के दोहरीकरण से इस महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मार्ग की क्षमता में काफी सुधार होगा। प्रतिदिन दोनों दिशाओं में पांच अतिरिक्त ट्रेनों के परिचालन और माल ढुलाई में 2.36 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की वृद्धि के साथ, यह परियोजना यात्री और माल ढुलाई दोनों सेवाओं में विश्वसनीयता और गति में सुधार लाएगी। इससे परिचालन दक्षता में वृद्धि के साथ ही राजस्थान के औद्योगिक और तीर्थ क्षेत्रों तक संपर्क सुविधा बढ़ेगी, जिसमें खाटू श्यामजी (सीकर) और सालासर बालाजी (चूरू) जैसे स्थलों तक पहुंचना और भी सुगम हो जाएगा।
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अभी इस रेलखंड की 77 प्रतिशत क्षमता का उपयोग हो रहा है, जिसके 2029-30 तक बढ़कर 210 प्रतिशत होने की संभावना है। दोहरीकरण से यह रेलखंड भविष्य में यातायात बढ़ोतरी को सुचारू तौर पर संभाल सकेगा। स्थानीय यात्री और व्यवसाय भी इस रेलखंड दोहरीकरण से लाभान्वित होंगे। इससे विलंब में कमी और समय पर रेल सेवा तथा माल ढुलाई में सुधार होगा, जिससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। ये रेल परियोजनाएं भारतीय रेलवे की समावेशी और संधारणीय परिवहन विकसित करने की प्रतिबद्धता दर्शाती हैं, जो संपर्क कमियों को दूर कर सेवा विश्वसनीयता में सुधार लाएगी और भारतीय रेल को आधुनिक, कुशल और नागरिक-केंद्रित भविष्य की ओर अग्रसर बनाएगी।
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