जहरीले पानी ने अब तक ली 16 जिंदगियां, सिस्टम ने की हत्या
मध्यप्रदेश के शहर इदौंर में नलों से पानी नहीं जहर बह रहा है…. और उस जहर ने एक नहीं दो नहीं बल्की 15 जिंदगियां निगल लीं है…. 15 दिन में 16 लोगों की मौत.. और सराकर क्या कह रही है कि घंटा कुछ हुआ है.. सवाल पूछे जा रहे हैं तो जवाब में संवेदना नहीं, सत्ता का अहंकार सुनाई दे रहा है… देश का सबसे साफ शहर कहलाने वाला इंदौर आज सिस्टम की सबसे गंदी तस्वीर दिखा रहा है…..
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है… 16 लोगों की जान गई जबकि 150 से ज्यादा लोग बीमार बताए जा रहे हैं.. हालात बहुत गंभीर हैं.. कई परिवार दिन औऱ रात केवल अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं…
बताया जा रहा है की उस इलाके में रहने वाले लोग पिछले कई दिनों से गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे… नलों से बदबूदार पानी, उसमें कीड़े-मकोड़े और ड्रेनेज का मिलावट की शिकायत… लेकिन नगर निगम और प्रशासन ने समय रहते शिकायत seriously ली नहीं और इसी लापरवाही ने 16 जान लेली.. यानी ये मौते हत्या साबित हुई.. सिस्टम की ली हुई जान…
भागीरथपुरा के घरों में हालात भयावह हैं… किचन में ड्रेनेज का पानी भरा है, दीवारों में सीलन, जाम टॉयलेट और हर तरफ गंदगी…. बच्चे रोज़ बीमार पड़ रहे हैं… हालात ऐसे कि लोग टैंकर या खरीदकर पानी पीने को मजबूर हैं… और उन टैंकरों पर भी साफ लिखा है कि— पीने योग्य पानी नहीं है… यानी जो पानी उन्हे साफ लग रहा है वो पानी भी जहरीला है…
26 दिसंबर को पहली मौत हुई
मौतों के बाद युवा कांग्रेस ने नगर निगम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया… पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं से घंटा भी जब्त किया.. घंटा लिए कांग्रेस के युवा लगातार सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे… यहां उनके हाथों में घंटा इसलिए था क्यों जब पानी पीने से मौत हुई और एक पत्रकार ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सवाल पूछा की इन मौतों पर क्या कहेंगे तो वे बोले की फोटक का सवाल मत पूछिए, घंटा आप कुछ जानते हैं… औऱ बस तभी से घंटा वाले मंत्री के खिलाफ प्रदर्शन होने लगा…. युवाओं का कहना है कि… भाजपा सरकार विकास के झूठे नारे लगाकर जनता को गटर का जहरीला पानी पिलाकर मौत के मुंह में धकेल रही है.. भोपाल में युवा कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन कर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पुतले को छोटे तालाब के गंदे पानी में डुबकी लगवाकर दूषित पानी पिलाया…. पर साबह पुतले को पानी पिलाने से कुछ होता तो शायद आधी से ज्यादा आबादी आज अपनी अपनी परेशानीयों का पूतला बना कर फूंक रही होती….
मध्य प्रदेश सरकार की कार्रवाई
बढ़ते दबाव के बाद सरकार ने कार्रवाई की… नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव को हटा दिया गया, एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को सस्पेंड कर दिया गया… मुख्यमंत्री ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही है…. लेकिन सरकार की हाईकोर्ट में पेश स्टेटस रिपोर्ट ने नया विवाद खड़ा कर दिया… रिपोर्ट में सिर्फ 4 मौतों की बात कही गई, जबकि परिजन और अस्पताल 10 से ज्यादा मौतों की पुष्टि कर चुके थे.. और अब ये मौत का आंकड़ा 15 पहुंच चुका है…
लेकिन सवाल सिर्फ आंकड़ों का नहीं है… सवाल उन जिंदगियों का है जो सिस्टम की लापरवाही में खत्म हो गईं… । क्या दोषियों को सजा मिलेगी या ये मामला भी फाइलों में दब जाएगा? जवाब अभी बाकी है… 6 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में मामले पर सुनवाई है… और देखना ये होगा की आखिर कब भागीरथपुरा के लोगों को साफ पानी मिलेगा…