Vande Ganga अभियान: जनभागीदारी और भूजल संरक्षण पर जोर

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खैरथल-तिजारा जिले के प्रभारी एवं कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीना ने ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ में आमजन की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से फील्ड में जाकर कार्यों का अवलोकन करने को कहा।

सोमवार को जिले में ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ की क्रियान्वयन समीक्षा बैठक में मंत्री डॉ. मीना ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ हिस्सा लिया। इस दौरान अभियान के पम्फलेट का विमोचन किया गया और सभी ने जल संरक्षण का संकल्प लिया।

पारंपरिक पद्धतियों के पुनरुद्धार और अधिकारियों की जिम्मेदारी

डॉ. मीना ने अभियान के तहत अब तक हुए कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि हर गतिविधि में आमजन की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को भूजल संरक्षण हेतु पारंपरिक पद्धतियों के पुनरुद्धार और जल संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक अधिकारी पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और यह जिम्मेदारी धरातल पर भी दिखनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से आमजन के हितों को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करने का आग्रह किया। मीना ने कहा कि योजनाओं के समुचित प्रचार-प्रसार और वंदे गंगा अभियान से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का प्रदेश कल्याण का सपना साकार होगा।

खैरथल-तिजारा जिला कलेक्टर किशोर कुमार ने पीपीटी के माध्यम से अभियान के तहत अब तक किए गए कार्यों और भविष्य के कार्यक्रमों की जानकारी दी।

दुर्लभ नाथ मंदिर में श्रमदान और पौधारोपण

इसके बाद, कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीना ने कोटकासिम स्थित दुर्लभ नाथ जी मंदिर, कतोपुर में ‘वंदे गंगा अभियान’ के तहत जोहड़ की सफाई में श्रमदान किया। उन्होंने “हरियालो राजस्थान” अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण भी किया। मंत्री ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मंत्री सहित अन्य अतिथियों ने पारंपरिक औजारों की सहायता से जोहड़ से मिट्टी निकालकर उसकी पाल पर डाली, जिससे जल संचयन की क्षमता बढ़ सके।

जल संरक्षण की शपथ और भविष्य की पीढ़ी की सुरक्षा

कार्यक्रम के दौरान प्रभारी मंत्री ने उपस्थित आमजन को जल संरक्षण की शपथ दिलाई। उन्होंने जल व पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि जल ही जीवन है, और इसका संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आज हम जल स्रोतों की रक्षा नहीं करेंगे, तो भविष्य की पीढ़ियों के लिए संकट खड़ा हो जाएगा।

उन्होंने जोर दिया कि वर्षा जल को सहेजने के लिए जोहड़, तालाब, कुएं जैसे पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन जरूरी है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे हर मौसम में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी देखभाल करें, क्योंकि वृक्षारोपण न केवल पर्यावरण को संतुलित करता है, बल्कि वर्षा और जल संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मंत्री ने कहा कि ऐसे सामूहिक प्रयासों (Collective Efforts) से ही जल संकट पर नियंत्रण पाया जा सकता है और एक स्वच्छ, हरित एवं टिकाऊ भविष्य की ओर हम अग्रसर हो सकते हैं।

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