भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता कपड़ा, चमड़ा और फुटवियर उद्योगों के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। इस समझौते पर वाणिज्य विभाग द्वारा आयोजित बैठक में इन क्षेत्रों के हितधारकों के साथ विस्तार से चर्चा हुई। यह समझौता निर्यातकों के लिए नए बाज़ार खोलने में सहायक होगा।
वाणिज्य मंत्री ने बताया कि समझौते के ज़रिये इन उद्योगों को ब्रिटेन में शून्य शुल्क पर उत्पाद बेचने की अनुमति मिलेगी। अभी तक इन पर 2% से 12% तक का आयात शुल्क लगता था। यह छूट बांग्लादेश, कंबोडिया और पाकिस्तान जैसे देशों के मुकाबले भारत की प्रतिस्पर्धा को मज़बूती देगी।
वाणिज्य सचिव ने ज़ोर दिया कि यह समझौता MSME को सशक्त बनाने के साथ-साथ समावेशी विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देगा। इससे भारतीय कारीगरों को वैश्विक पहचान मिलेगी और उनके उत्पादों की मांग भी बढ़ेगी।
बैठक में CLE, CII, CIFI, IFCOMA, FDDI, CLRI, LSSC जैसी संस्थाएं, विभिन्न निर्यात संवर्धन परिषदें और कई सरकारी विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इन सभी ने क्षेत्रीय तैयारियों और समझौते से उत्पन्न अवसरों पर विचार-विमर्श किया।
भारतीय उत्पादों को अब ब्रिटेन में वह दर्जा मिलेगा जो अभी तक कुछ खास देशों को प्राप्त था। रेडीमेड गारमेंट्स, होम टेक्सटाइल्स, कार्पेट और हस्तशिल्प जैसे उत्पाद शून्य शुल्क पर वहां बेचे जा सकेंगे।
इस बदलाव से तिरुपुर, जयपुर, सूरत, लुधियाना, पानीपत, भदोही और मुरादाबाद जैसे प्रमुख कपड़ा संकुलों को सीधा लाभ मिलेगा। यह समझौता भारत को वैश्विक व्यापार में बेहतर स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा।