छात्रसंघ चुनाव से लेकर यमुना जल परियोजना तक:अशोक गहलोत का प्रदेश सरकार पर हमला

By admin
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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की दिल्ली यात्रा को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा गया कि यह पार्टी के अंदरूनी मामले हैं। जबसे उपराष्ट्रपति धनखड़ का प्रकरण सामने आया है, सरकार खुद रक्षात्मक स्थिति में आ गई है। धनखड़ को लेकर विपक्ष और कांग्रेस की शिकायतें पहले से रही हैं, लेकिन जिस तरह से उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया या उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया, यह अब भी रहस्य बना हुआ है।

संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्ति का इस्तीफा कोई सामान्य घटना नहीं होती। एक सांसद भी अगर इस्तीफा देता है या कोई सार्वजनिक बयान देता है, तो उसे स्पष्ट करना होता है। लेकिन उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद न तो उन्होंने कोई बयान दिया, न प्रेस से बात की और न ही सरकार ने कोई जानकारी साझा की कि आखिर किन कारणों से इस्तीफा दिया गया। क्या सरकार नाराज़ थी? क्या मंत्रियों या प्रधानमंत्री के साथ मतभेद थे? यह सब अब तक स्पष्ट नहीं है।

अगर संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्ति को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जाता है, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर विषय है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और मुख्य न्यायाधीश जैसे पदों पर बैठे लोगों के इस्तीफे देश को स्पष्ट रूप से बताए जाने चाहिए। क्या धनखड़ को अपनी बात रखने का अवसर मिला? क्या उन्हें स्पष्टीकरण देने का मौका दिया गया? यह सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।

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