पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के जमाने में स्थापित विदेश नीति का पालन नहीं होने के कारण अब देश को इसके नतीजे भुगतने पड़ रहे हैं। बीकानेर के सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने यह बात कही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ के सवाल पर उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की विदेश नीति हमेशा स्थिर रही है, चाहे सरकार किसी भी पार्टी की रही हो। वाजपेयी, मोरारजी देसाई जैसे नेताओं ने भी नेहरू की नीति को जारी रखा था।
गहलोत ने कहा कि नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में विदेश नीति में जो दायें-बायें हो रहा है, उसका नुकसान देश को उठाना पड़ रहा है। पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार से रिश्ते बिगड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि इंडो-पाक ऑपरेशन के समय पाकिस्तान के साथ चीन, तुर्की और आर्मेनिया जैसे देश खुलकर खड़े थे, जबकि रूस चुप था। इससे संकेत मिलता है कि भारत की विदेश नीति में कुछ बदलाव हुआ है।
उन्होंने कहा कि ट्रंप ने टैरिफ को लेकर जो बयान दिया है, वह शायद बार्गेनिंग की रणनीति हो सकती है। बातचीत अभी चल रही है और अगले सात दिन में क्या परिणाम निकलते हैं, यह देखना होगा। भारत सरकार को नई नीति बनानी होगी जिससे ड्यूटी कम करने वाले देशों से सहयोग लिया जा सके। कोई न कोई तरीका निकाला जाएगा जिससे नुकसान की भरपाई हो सके।
गहलोत ने कहा कि अमेरिका के साथ भारत के संबंध लंबे समय से सुधरते रहे हैं, लेकिन अब जो स्थिति बनी है उसमें ये संबंध काम नहीं आ रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि नेहरू की विदेश नीति को सभी सरकारों ने अपनाया था, लेकिन अब उसमें बदलाव हो रहा है जिसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिख रहा है।