बिशनगढ़ थाना क्षेत्र के केशवना गांव में पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल, पीड़ित परिवार ने लगाई निष्पक्ष जांच की गुहार
जालोर: जिले के बिशनगढ़ थाना क्षेत्र के केशवना गांव में संपत्ति विवाद के बीच पुलिस की दबंगई का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी न्यायिक आदेश के घर खाली करवाने की कार्रवाई की और विरोध करने पर महिलाओं व नाबालिग बेटियों से मारपीट की।
घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिसकर्मी घर में घुसकर महिलाओं और लड़कियों को खींचते और बाहर निकालते दिखाई दे रहे हैं। पीड़ित पक्ष के अनुसार, पुलिस ने घर पर ताला लगाकर परिवार को जबरन बाहर निकाल दिया।
17 वर्षीय दीपिका ने अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान देते हुए बताया कि बुधवार को एसएचओ निम्बसिंह, एएसआई ताराराम, तथा स्थानीय निवासी जनकसिंह और नवीन कुमार घर में जबरन घुसे और उनकी मां ललिता देवी, बहन अर्चना, दादी शांति देवी व काका लक्ष्मणदास के साथ मारपीट की। इसके बाद सभी को पुलिस वाहन में डालकर थाने ले जाया गया।
मामले की जड़ एक पुराने संपत्ति विवाद से जुड़ी बताई जा रही है। नवीन पुत्र चंपालाल जैन ने दावा किया कि उसके पिता ने यह मकान वर्ष 2006 में खरीदा था, जबकि कैलाश नामक व्यक्ति का कहना है कि यह उनका पुश्तैनी मकान है और वे लंबे समय से बिजली-पानी के बिल नियमित रूप से जमा करते आ रहे हैं।
कैलाश का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी शिकायत थाने में दर्ज करानी चाही तो पुलिस ने रिपोर्ट फाड़ दी और उन्हें थाने में बैठा लिया।
जालोर बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अश्विन राजपुरोहित ने इस घटना पर कहा कि “ऐसे मामलों में पुलिस को सीधे कार्रवाई का अधिकार नहीं है। किसी मकान पर कब्जा दिलवाना या खाली करवाना केवल सिविल कोर्ट के आदेश से ही संभव है।”
फिलहाल इस घटना ने बिशनगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार ने न्याय की गुहार लगाते हुए जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।