प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने के अंत में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन जा सकते हैं। यह सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच चीन के तियानजिन शहर में आयोजित होगा। इसमें रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमीर पूतिन के भी भाग लेने की संभावना है।
मोदी की यह यात्रा जून 2018 के बाद पहली बार होगी जब वे चीन का दौरा करेंगे, हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है। 2020 में गलवान संघर्ष के बाद अक्टूबर 2024 में रूस के कज़ान में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात हुई थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव में कुछ नरमी आई है। हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी चीन की यात्रा की थी।
एससीओ सम्मेलन में मोदी की भागीदारी भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक अहम पहल मानी जा सकती है। मोदी ने पिछली बार 2018 में चीन का दौरा किया था और फिर कज़ान में शी जिनपिंग से अलग से बातचीत की थी, जिसे संबंधों में सुधार की दिशा में पहला कदम माना गया।
हाल ही में विदेश मंत्री जयशंकर ने एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी से बातचीत की थी। इस दौरान वांग यी ने कहा कि भारत और चीन के संबंधों में सुधार और विकास की रफ्तार बनी हुई है, और यह प्रक्रिया सहज नहीं है, इसलिए इसे बहुत सावधानी और संवेदनशीलता से आगे बढ़ाना होगा।
प्रधानमंत्री मोदी की यह संभावित यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और चीन अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। साथ ही, चीन इस सम्मेलन की मेज़बानी पाँचवीं बार कर रहा है।