राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को कृषि एवं सहकारिता विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान किसानों से जुड़े मुद्दों के साथ सियासी बयानबाजी भी जमकर हुई। कई विधायकों ने कहा कि केवल ऋण माफी से किसान आत्मनिर्भर नहीं बनेंगे। फसल खराब होने की स्थिति में सात दिन के भीतर बीमा राशि दिलाने की व्यवस्था होनी चाहिए।
किरोड़ी लाल मीणा की उपेक्षा का आरोप
उपनेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा ने भाजपा पर कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनसे अन्याय हुआ है। उम्मीद थी कि उन्हें मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री या गृहमंत्री बनाया जाएगा, लेकिन उनके विभागों के टुकड़े कर दिए गए। रामकेश ने यहां तक कहा कि यदि किरोड़ी लाल गंगापुर से चुनाव लड़ने आते हैं तो वे सीट खाली करने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब भी कोई बड़ा संकट आता है तो भाजपा किरोड़ी लाल को आगे करती है, जबकि उनके खिलाफ अंदरूनी षड्यंत्र चल रहा है।
“किरोड़ी लाल को कौनसी शक्ति नहीं दी?”
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने पलटवार करते हुए कहा कि किरोड़ी लाल मीणा को पूरी शक्तियां दी गई हैं और उनकी उपेक्षा का सवाल ही नहीं उठता। वहीं गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने तंज कसते हुए कहा कि श्रवण कुमार को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए। इस पर श्रवण कुमार ने जवाब दिया कि उन्हें किसी पद की इच्छा नहीं है। उन्होंने कहा कि चाहे जमाना कितना भी डिजिटल क्यों न हो जाए, रोटी गूगल से डाउनलोड नहीं हो सकती—वह किसान की मेहनत से ही पैदा होती है। इसलिए किसान को ऋण माफ कर परजीवी न बनाया जाए।
बीमा और रसायनों पर चिंता
भाजपा विधायक संजीव कुमार ने कहा कि सैटेलाइट आधारित फसल खराबा आकलन से बीमा कंपनियों को अधिक लाभ मिल रहा है। साथ ही फसलों में रसायनों के अत्यधिक उपयोग से कैंसर जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। कांग्रेस विधायक पितराम सिंह काला ने आरोप लगाया कि बीमा कंपनियां 28 प्रतिशत तक मुनाफा कमा रही हैं, जिसे सीमित किया जाना चाहिए।
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