प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड: उम्मीद, रहस्य और चिंता की कहानी

4 Min Read

शायद आपने प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के बारे में बहुत कम सुना होगा। यह प्रोजेक्ट साल 2013 में राजस्थान में शुरू किया गया था। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, जिसे स्थानीय भाषा में गोडावण कहा जाता है, सिर्फ एक आम पक्षी नहीं है—यह राजस्थान का राज्य पक्षी है और दुनिया के सबसे संकटग्रस्त जीवों में से एक है।

स्थिति की गंभीरता समझिए—जहां बाघों को बचाने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट चलाए गए हैं, वहीं गोडावण उससे भी ज्यादा असुरक्षित श्रेणी में आता है। गुजरात के कच्छ में तो अब केवल तीन मादा गोडावण ही बची बताई जाती हैं।

तो आखिर अचानक इस पक्षी की बात क्यों?|प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड

दरअसल, जैसलमेर के ब्रीडिंग सेंटर से एक गोडावण का अंडा गुजरात के कच्छ लाया गया। करीब 770 किलोमीटर का सफर 19 घंटे में तय किया गया। 26 मार्च 2026 को उस अंडे से चूजा निकला, जिससे वैज्ञानिकों में खुशी की लहर दौड़ गई। उसकी 24 घंटे निगरानी की जा रही थी और सुरक्षा के लिए करीब 50 गार्ड भी तैनात थे। लेकिन इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद वो चूजा अचानक रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया।यह घटना कई सवाल खड़े करती है—क्या यह सुरक्षा में चूक थी या कुछ और? जहां जैसलमेर से अच्छी खबरें आ रही हैं, वहीं कच्छ से आई यह घटना एक बड़ा रहस्य बन गई है।


जैसलमेर में ‘ट्रिपल’ सफलता

जहां एक तरफ यह रहस्य है, वहीं जैसलमेर ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन (AI) तकनीक के जरिए तीन नए चूजों को जन्म दिलाने में सफलता पाई है। इनमें से एक चूजा रामदेवरा सेंटर और दो सुदासरी सेंटर में पैदा हुए हैं। इस सफलता के बाद इन केंद्रों में गोडावणों की कुल संख्या बढ़कर 76 हो गई है। यह क्यों खास है? क्योकि गोडावण प्राकृतिक रूप से साल में सिर्फ एक अंडा देता है। ऐसे में यह उपलब्धि इस विलुप्ति के कगार पर खड़े पक्षी के लिए किसी “लाइफलाइन” से कम नहीं है। बृजमोहन गुप्ता, DFO, डेजर्ट नेशनल पार्क ने कहा:
“वैज्ञानिक पद्धति से गोडावणों को नई संजीवनी मिल रही है। यह साबित करता है कि हम राज्य पक्षी को बचाने की सही दिशा में बढ़ रहे हैं।”


‘सेरोगेसी’ पर सवाल

जहां जैसलमेर जश्न मना रहा है, वहीं कच्छ की घटना ने चिंता बढ़ा दी है। ‘जंपस्टार्ट’ तकनीक के जरिए जैसलमेर से भेजे गए अंडे से चूजा तो निकल आया, लेकिन कुछ ही दिनों में वह गायब हो गया—वो भी कड़ी सुरक्षा के बीच।क्या यह सुरक्षा में बड़ी चूक थी?विशेषज्ञों का मानना है कि हो सकता है किसी छोटी सी चूक का फायदा उठाकर कुत्ता, सियार या जंगली बिल्ली ने 26 दिन के इस चूजे को अपना शिकार बना लिया हो।


चुनौतियां और आगे की राह

वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट सुमित डूकिया के अनुसार, गोडावण के चूजों की मृत्यु दर पहले से ही काफी ज्यादा होती है। अब जैसलमेर में इन पक्षियों को ‘सॉफ्ट रिलीज’ प्रक्रिया के जरिए धीरे-धीरे खुले वातावरण में छोड़ने की तैयारी चल रही है। लेकिन कच्छ की घटना ने जमीनी स्तर की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।आज दुनिया में 150 से भी कम गोडावण बचे हैं, जिनमें से अधिकांश जैसलमेर में हैं। इनके सामने सबसे बड़े खतरे हाईटेंशन बिजली लाइनों और शिकारियों से हैं।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *