राजस्थान में 186 Toll Plaza पर फास्टैग की सुविधा, कैश वसूली पर लगेगी रोक
राजस्थान: राजस्थान के 186 Toll Plaza में से अब 172 टोल प्लाजा पर फास्टैग सुविधा शुरू की जा रही है। इस बदलाव के बाद, Toll पर कैश वसूली की प्रथा को समाप्त कर दिया जाएगा और वाहन मालिकों को केवल फास्टैग के माध्यम से ही टोल शुल्क का भुगतान करना होगा। यह कदम राज्य में सड़क सुरक्षा और यातायात को आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस सुविधा को लागू करने की प्रक्रिया आगामी सप्ताह में और भी तेज की जाएगी, क्योंकि 8 और टोल प्लाजा पर भी फास्टैग की सुविधा शुरू कर दी जाएगी।
Fastag से हो रही सुविधाओं में वृद्धि
राजस्थान के सार्वजनिक निर्माण विभाग के प्रमुख शासन सचिव, प्रवीण गुप्ता ने बताया कि इस बदलाव का उद्देश्य सड़कों पर यातायात को सुगम बनाना और Toll पर होने वाली भीड़ को कम करना है। उन्होंने कहा कि फास्टैग के माध्यम से Toll भुगतान में तेजी आएगी, जिससे यात्रियों को समय की बचत होगी। इससे न केवल यातायात की सुगमता में वृद्धि होगी, बल्कि प्रदूषण में भी कमी आएगी क्योंकि वाहनों को Toll बूथ पर लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा।
प्रमुख शासन सचिव का बयान
प्रवीण गुप्ता ने बताया कि उपमुख्यमंत्री एवं सार्वजनिक निर्माण विभाग मंत्री, दिया कुमारी के नेतृत्व में विभाग ने बहुत कम समय में प्रदेश के सभी प्रमुख टोल बूथों पर फास्टैग इंस्टॉलेशन का कार्य पूरा किया है। इस कदम को राज्य सरकार ने जनसुविधा को प्राथमिकता देते हुए लिया है। विभाग ने तेजी से यह कार्य संपन्न किया ताकि फास्टैग की सुविधा शीघ्र प्रभावी हो सके और राज्य के नागरिकों को इसका लाभ मिल सके।
कैश वसूली पर लगी रोक
राजस्थान में फास्टैग के व्यापक उपयोग के साथ-साथ कैश वसूली की प्रक्रिया को समाप्त किया जा रहा है। पहले, वाहन चालक टोल बूथों पर जाकर कैश के माध्यम से शुल्क का भुगतान करते थे, जिससे न केवल समय की बर्बादी होती थी, बल्कि Toll पर वाहनों की लंबी कतारें लगने की समस्या भी उत्पन्न होती थी। अब फास्टैग के जरिए यह प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल हो जाएगी, जिससे न केवल यात्रा समय में कमी आएगी बल्कि टोल बूथों पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या में भी कमी आएगी।
Fastag की बढ़ती लोकप्रियता
फास्टैग की सुविधा पहले ही भारत सरकार द्वारा देशभर में लागू की जा चुकी है, और यह अब राजस्थान राज्य में भी महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुँच चुकी है। फास्टैग एक डिजिटल टोल संग्रहण प्रणाली है, जो वाहन मालिकों को बिना रुके टोल शुल्क अदा करने की सुविधा प्रदान करती है। यह एक रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान (RFID) तकनीक पर आधारित है, जिससे वाहन के विंडशील्ड पर लगे फास्टैग को स्कैन करके टोल शुल्क का भुगतान स्वत: ही कर दिया जाता है। यह प्रणाली सरकार की ‘स्मार्ट इंडिया’ पहल के तहत डिजिटल ट्रांजैक्शंस को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम है।
Fastag से होने वाले लाभ
- समय की बचत: फास्टैग के माध्यम से Toll प्लाजा पर लंबी कतारों से बचने में मदद मिलती है, जिससे यात्रियों का समय बचेगा। यह सुनिश्चित करता है कि वाहन बिना रुके अपना रास्ता तय कर सकें।
- पर्यावरणीय लाभ: फास्टैग से वाहनों की गति बनी रहती है, जिससे वायु प्रदूषण में कमी आती है, क्योंकि गाड़ियाँ टोल प्लाजा पर रुकने से बचती हैं।
- डिजिटल ट्रांजैक्शंस: यह पूरी प्रक्रिया कैशलेस है, जिससे नकद भुगतान की जरूरत नहीं पड़ती और पारदर्शिता बढ़ती है।
- प्रभावी निगरानी: फास्टैग के माध्यम से टोल संग्रहण को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है, जिससे टोल शुल्क के संग्रह में कोई गड़बड़ी नहीं हो सकती।
विभाग की ओर से कदम उठाए गए उपाय
राजस्थान सरकार ने फास्टैग के सफल क्रियान्वयन के लिए कई उपाय किए हैं। जिनमें प्रमुख है, Toll बूथों पर फास्टैग की इंस्टॉलेशन प्रक्रिया की शीघ्रता से शुरूआत और अधिक से अधिक टोल बूथों पर इसे स्थापित करना। साथ ही, विभाग ने लोगों को फास्टैग के लाभ और उपयोग के बारे में जागरूक करने के लिए विभिन्न प्रचार अभियान भी चलाए हैं।
इसके अतिरिक्त, सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि फास्टैग का कार्यान्वयन पूरी तरह से निर्बाध और स्थिर हो, ताकि आने वाले समय में कोई तकनीकी समस्या उत्पन्न न हो।
Jogeshwar Garg ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए डॉ. अंबेडकर को भारत रत्न देने का श्रेय भाजपा को दिया