उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar का कृषि मंत्री से सवाल: ‘किसानों से किए वादे क्यों नहीं निभाए गए?’
कृषि मंत्री के खिलाफ उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar द्वारा किसानों के प्रति केंद्र सरकार के रवैये पर उठाए गए सवालों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उपराष्ट्रपति ने मंगलवार को कृषि मंत्री से सवाल किया कि आखिर उन किसानों से किए गए लिखित वादों को क्यों नहीं निभाया गया, जिन्हें सरकार ने उनसे पहले किए थे। इस मुद्दे को लेकर उपराष्ट्रपति ने अपनी चिंता जताते हुए कृषि मंत्री से सवाल किया कि किसानों के अधिकारों के मामले में क्या कदम उठाए जा रहे हैं, और वादों के पूरा न होने की वजह क्या है।
कृषि मंत्री से सवाल: क्या वादा निभाया गया?
उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar का यह सवाल उन वादों को लेकर है, जो केंद्र सरकार ने किसानों से किए थे, खासकर 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान। Jagdeep Dhankhar का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह कृषि मंत्री से पूछ रहे हैं, “कृषि मंत्री जी, एक-एक पल भारी है। मेरा आपसे आग्रह है कि कृपया मुझे बताएं, क्या किसान से वादा किया गया था? वादा क्यों नहीं निभाया गया? वादा निभाने के लिए हम क्या कर रहे हैं?” Jagdeep Dhankhar ने यह सवाल तब उठाया जब वे एक कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे, जहां किसानों से किए गए वादों के पूरा न होने पर उन्होंने अपनी निराशा जाहिर की।
किसानों से वार्ता का अभाव और वादे न निभाने पर सवाल
Jagdeep Dhankhar ने इस मुद्दे पर और गंभीर चिंता जताते हुए कहा, “मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि किसान से वार्ता क्यों नहीं हो रही है। हम किसानों को पुरस्कृत करने की बजाय उनका सही हक भी नहीं दे रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल भी किसानों ने आंदोलन किया था और इस साल भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। किसान लगातार अपनी मांगों को लेकर सड़क पर हैं, लेकिन सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
भारत का सपना और किसानों की पीड़ा
Jagdeep Dhankhar ने अपने संबोधन में भारत के भविष्य के बारे में भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि, “मैंने भारत को बदलते हुए देखा है, लेकिन पहली बार मुझे यह महसूस हो रहा है कि ‘विकसित भारत’ हमारा सपना नहीं, लक्ष्य बन चुका है। दुनिया में भारत कभी इतनी बुलंदी पर नहीं था, लेकिन जब ऐसा हो रहा है, तो मेरा किसान परेशान और पीड़ित क्यों है?” उनका यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि कृषि क्षेत्र में हो रही समस्याओं के बावजूद किसानों को राहत देने के लिए सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
किसानों के लिए सही हक और उनकी असहाय स्थिति
Jagdeep Dhankhar ने यह भी कहा कि किसान एकमात्र वर्ग है जो असहाय महसूस कर रहा है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि जब देश तरक्की कर रहा है, तो किसानों को उनका सही हक क्यों नहीं मिल रहा है और क्यों उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है? उनका यह बयान यह बताता है कि वह किसानों के मुद्दों को अत्यधिक गंभीरता से ले रहे हैं और सरकार से अपेक्षाएं रखते हैं कि किसानों के हक में कोई ठोस कदम उठाए जाएं।
कृषि कानूनों पर विवाद और आंदोलन की पृष्ठभूमि
Jagdeep Dhankhar का बयान उस समय आया है जब कृषि कानूनों को लेकर देश भर में विवाद लगातार बना हुआ है। सरकार ने 2020 में तीन नए कृषि कानून पेश किए थे, जिनका विरोध किसानों ने व्यापक स्तर पर किया था। किसानों का आरोप था कि ये कानून उनके खिलाफ हैं और उन्हें बड़े कॉर्पोरेट्स के सामने कमजोर बना देंगे। इसके खिलाफ किसान पूरे देश में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, जो 2021 में दिल्ली की सीमाओं पर एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका था। सरकार ने अंततः इन कानूनों को रद्द कर दिया, लेकिन इसके बावजूद किसानों के कई मुद्दे सुलझे नहीं हैं, जो अब भी उनके लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
किसान आंदोलन और सरकारी रवैया
किसान आंदोलन को लेकर उपराष्ट्रपति का यह बयान सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है। किसानों को लेकर उपराष्ट्रपति का यह बयान एक कड़े संदेश के रूप में आया है, जिसमें उन्होंने सरकार से यह पूछा कि किसानों के साथ किए गए वादों का क्या हुआ। किसान संगठन और नेताओं का कहना है कि सरकार ने आंदोलन के दौरान जो वादे किए थे, उन्हें अब तक पूरा नहीं किया गया है, जिससे किसानों में निराशा और गुस्से की भावना बढ़ी है।
कृषि मंत्री से उपराष्ट्रपति का सीधा सवाल
Jagdeep Dhankhar का कृषि मंत्री से सीधा सवाल था कि किसानों से किए गए वादों का पालन क्यों नहीं किया गया। उनका यह बयान यह दर्शाता है कि वह किसानों के मुद्दों को केंद्र में रखकर सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। उपराष्ट्रपति का यह सवाल न सिर्फ कृषि मंत्री से था, बल्कि सरकार की नीतियों पर एक व्यापक सवाल खड़ा करता है कि आखिरकार किसानों को राहत क्यों नहीं मिल रही है।
किसानों की स्थिति और आगामी कदम
उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसानों की स्थिति लगातार खराब हो रही है और उन्हें उनका उचित हक नहीं मिल रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को पुरस्कृत करने की बजाय उनका शोषण किया जा रहा है। यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि सरकार को किसानों के कल्याण के लिए अधिक ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि उनकी हालत सुधारी जा सके और वे अपने हक को महसूस कर सकें।
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