US Airstrike Syria: अमेरिका ने B-52 बॉम्बर से सीरिया में मचाया तवाही, निशाने पर कौन

By Editor
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B-52

अमेरिका का सीरिया में बमबारी अभियान: B-52 बॉम्बर्स से आतंकवादी ठिकानों पर हमले

B-52 बॉम्बर्स: सीरिया में बशर अल-असद के शासन के अंत के बाद अमेरिकी सेना ने आतंकवादी ठिकानों पर बमबारी की 8 दिसंबर, 2024 को सीरिया में ऐतिहासिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब बशर अल-असद और उनका परिवार देश छोड़कर मॉस्को भाग गए। इस कदम के साथ ही सीरिया में 50 साल से अधिक समय तक चले असद परिवार के शासन का अंत हो गया। असद की सत्ता के खात्मे के बाद, अमेरिका ने सीरिया में अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी। अमेरिकी सेना ने सीरिया के मध्य क्षेत्र में 75 हवाई हमले किए, जिनमें आतंकवादी गुट ISIS के ठिकानों को निशाना बनाया गया।

B-52 बॉम्बर्स से ISIS और HTS के ठिकानों पर हमला

अमेरिका द्वारा किए गए इन हमलों में B-52 बॉम्बर्स का इस्तेमाल किया गया, जो भारी और लंबी दूरी तक मार करने वाले बमबारी विमान हैं। इन हमलों का मुख्य लक्ष्य ISIS के आतंकवादी गढ़ों और HTS (हयात तहरीर अल-शाम) के ठिकानों को नष्ट करना था। यह हमले उस समय किए गए, जब बशर अल-असद के शासन के समाप्त होने के साथ सीरिया में सत्ता की बड़ी हलचल चल रही थी।

बशर अल-असद का पलायन और सीरिया में सत्ता की नई स्थिति

8 दिसंबर 2024 को बशर अल-असद ने अचानक अपने परिवार के साथ सीरिया छोड़ दिया। उनकी यह रवानगी सीरिया में एक नए दौर की शुरुआत को चिह्नित करती है। विद्रोहियों ने दमिश्क पर कब्जा कर लिया और देश की सत्ता पर काबिज हो गए। असद का पलायन सीरिया के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ, क्योंकि इसके बाद से देश में एक नए राजनीतिक परिदृश्य की संभावना बन गई।

अमेरिकी सेना द्वारा किए गए हमले के बाद, ISIS और अन्य आतंकवादी गुटों के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई और तेज हो गई। अमेरिका ने पहले ही अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी थी कि वह ISIS और अन्य आतंकवादी समूहों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगा, और यह हमले इस रणनीति का हिस्सा थे

ISIS और HTS के खिलाफ संघर्ष: अमेरिकियों का नया मोर्चा

सीरिया में लंबे समय से ISIS का गढ़ रहा है, और इस संगठन ने युद्ध के दौरान अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी। हालाँकि, ISIS ने सीरिया के विभिन्न हिस्सों में अपने ठिकाने बना लिए थे, लेकिन हयात तहरीर अल-शाम (HTS) जैसे समूहों के साथ उनका गठजोड़ भी देखा गया था। HTS के प्रमुख अबू मोहम्मद अल-जुलानी ने पहले ISIS के साथ मिलकर संघर्ष किया था, लेकिन बाद में उसने ISIS से दूरी बना ली और सीरिया में एक स्वतंत्र आंदोलन के रूप में अपनी पहचान बनाई। हालांकि, HTS ने घोषणा की थी कि वह ISIS के खिलाफ अभियान चला रहा है, लेकिन अमेरिका के हमले के बाद यह स्पष्ट हो गया कि HTS और ISIS के ठिकाने एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

अमेरिकी बमबारी का उद्देश्य: आतंकवादी गढ़ों का सफाया

B-52: अमेरिकी सेना ने B-52 बॉम्बर्स का इस्तेमाल करते हुए ISIS और HTS के कई ठिकानों को नष्ट किया। इन हमलों का उद्देश्य सीरिया में आतंकवादियों के नेटवर्क को कमजोर करना था। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इन हमलों से ISIS और HTS के महत्वपूर्ण ठिकाने नष्ट हो गए हैं, जिससे इन गुटों की गतिविधियों को कड़ा झटका लगा है।

अमेरिका के B-52 बॉम्बर्स ने सीरिया के कई बड़े क्षेत्रों में बम गिराए, जिसमें विशेष रूप से ISIS के अड्डों, गोला-बारूद के भंडारों और आतंकी संगठनों के कमांड सेंटर को निशाना बनाया गया। इन हमलों से आतंकवादियों के संचालन में रुकावट आई है और इनका नेटवर्क कमजोर हुआ है।

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बारे में सीरियाई प्रतिक्रिया

B-52: अमेरिका की इस हवाई कार्रवाई के बाद सीरिया की सरकार ने इसे एक और संगठित हमला बताया और इसकी कड़ी निंदा की। हालांकि, सीरिया के बशर अल-असद के सत्ता से बाहर होने के बाद देश में सत्ता की स्थिति और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सीरिया में एक नई सरकार बनने के बाद इन अमेरिकी हमलों को एक नई रणनीति के तहत देखा जाएगा।

वैश्विक प्रतिक्रिया और आगामी घटनाक्रम

B-52: अमेरिका के इन हवाई हमलों ने दुनिया भर के देशों से प्रतिक्रिया का सिलसिला शुरू कर दिया है। जहां एक ओर कुछ देशों ने इस सैन्य कार्रवाई को आतंकी गुटों के खिलाफ उचित कदम बताया है, वहीं कुछ देशों ने इसे सीरिया की आंतरिक स्थिति में हस्तक्षेप करार दिया है। हालांकि, अमेरिका के रुख के अनुसार, उनका उद्देश्य केवल आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करना है, न कि सीरिया की आंतरिक राजनीति में शामिल होना।

अगले कुछ हफ्तों में सीरिया की राजनीतिक स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, क्योंकि बशर अल-असद का पलायन और विद्रोहियों का दमिश्क पर कब्जा एक नए युद्ध और संघर्ष के दौर को जन्म दे सकता है। यह भी देखना होगा कि ISIS और HTS जैसे आतंकवादी गुट सीरिया में अपनी पकड़ बनाए रख पाते हैं या नहीं, और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद इनकी रणनीति क्या होगी।

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