EVM विवाद पर कांग्रेस की अलग-थलग स्थिति, उमर अब्दुल्ला और अभिषेक बनर्जी ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद, पार्टी ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना शुरू किया था। हालांकि, इस मुद्दे पर कांग्रेस अब अकेली नजर आ रही है, क्योंकि विपक्षी दलों के कई प्रमुख नेता, जिनमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी शामिल हैं, कांग्रेस के दावों को चुनौती दे रहे हैं। इस लेख में हम कांग्रेस के EVM विवाद पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाओं और भाजपा के रुख पर चर्चा करेंगे।
कांग्रेस का EVM पर आरोप और विपक्ष की प्रतिक्रियाएं
हरियाणा और महाराष्ट्र चुनावों में कांग्रेस को मिली हार के बाद पार्टी के नेताओं ने EVM को हार का जिम्मेदार ठहराया। पार्टी ने आरोप लगाया कि इन चुनावों में EVM से छेड़छाड़ की गई थी और इसके कारण उनकी हार हुई। लेकिन इस मुद्दे पर कांग्रेस अब अकेली पड़ती नजर आ रही है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस के इस आरोप पर सवाल उठाए हैं।
उमर अब्दुल्ला का बयान
उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस के EVM पर उठाए गए सवालों को लेकर कहा, “जब आपको सौ से अधिक सांसद एक ही EVM का इस्तेमाल करते हुए मिलते हैं और आप इसे अपनी पार्टी की जीत के रूप में मनाते हैं, तो आप कुछ महीने बाद यह नहीं कह सकते कि… हमें ये ईवीएम पसंद नहीं हैं।” उनका यह बयान कांग्रेस की नीति को चुनौती देता है, क्योंकि उन्होंने कांग्रेस द्वारा पहले ईवीएम से जीत की खुशी मनाने और बाद में हार पर उसी ईवीएम को दोष देने के रवैये पर सवाल उठाया है।
यहां एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उमर अब्दुल्ला ने EVM को लेकर कांग्रेस के दावों को खारिज किया है, जबकि उनकी अपनी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, भी विपक्षी इंडिया गठबंधन का हिस्सा है। उनके इस बयान से कांग्रेस के दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है, जो ईवीएम को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार चिंता व्यक्त कर रही थी।
अभिषेक बनर्जी का बयान
अब, तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी कांग्रेस के EVM विवाद को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “अगर उनके पास कुछ है, तो उन्हें भारत के चुनाव आयोग को अपने दावों का ‘डेमो’ दिखाना चाहिए।” बनर्जी ने यह भी कहा कि ईवीएम की रैंडमाइजेशन प्रक्रिया यदि ठीक से की जाती है और बूथ स्टाफ मॉक पोल और मतगणना के दौरान पूरी तरह से जांच करता है, तो इन आरोपों में कोई दम नहीं है।
अभिषेक ने कांग्रेस या राहुल गांधी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा स्पष्ट रूप से कांग्रेस के नेताओं की ओर था। उन्होंने आगे कहा, “अगर फिर भी किसी को लगता है कि EVM को हैक किया जा सकता है, तो उन्हें चुनाव आयोग से मिलना चाहिए और दिखाना चाहिए कि ईवीएम को कैसे हैक किया जा सकता है।” बनर्जी का यह बयान कांग्रेस की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, क्योंकि वह दावा कर रहे हैं कि केवल बयानबाजी से कोई फायदा नहीं होगा।
कांग्रेस के दावे और विपक्षी दलों का समर्थन
इस समय कांग्रेस ने अपनी हार को लेकर EVM पर लगातार सवाल उठाए हैं और पेपर बैलेट के लिए वापस जाने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में हार के बाद यह मुद्दा और भी गंभीर हो गया है। हालांकि, उमर अब्दुल्ला और अभिषेक बनर्जी जैसे प्रमुख नेताओं ने इन आरोपों को खारिज किया है।
इसी बीच, भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) ने कांग्रेस के इस रवैये पर जमकर निशाना साधा है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि अगर उन्हें चुनाव लड़ना नहीं आता, तो उन्हें EVM को दोष नहीं देना चाहिए। पात्रा ने कहा, “नेता बनने का गुण होता है, वह आपको अंदर से लाना पड़ेगा। थोपने से नहीं होता है।” उन्होंने आगे कहा, “आपके पास एक नेता के गुण होने चाहिए। जबरदस्ती मैं नेता हूं, मैं नेता हूं… कहने और सफेद टी-शर्ट पहनकर ऐसे बैठने से कोई नेता नहीं हो जाता।”
विपक्षी एकजुटता और भाजपा का पलटवार
यह महत्वपूर्ण है कि तृणमूल कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस, दोनों ही कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं। ऐसे में, कांग्रेस के EVM पर उठाए गए सवालों के बीच इन दोनों नेताओं का बयान विपक्ष की एकजुटता पर सवाल खड़ा कर रहा है। अभिषेक बनर्जी और उमर अब्दुल्ला की टिप्पणियां कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती हैं, क्योंकि अब यह मुद्दा केवल पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे विपक्षी गठबंधन का बनता जा रहा है।
भा.ज.पा. ने भी इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस की आलोचना की है और कहा है कि अगर राहुल गांधी को लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है, तो उन्हें अपनी पार्टी की रणनीति में बदलाव करना चाहिए।
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