किसान नेता Rakesh Tikait ने पंजाब के किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के 21वें दिन के आमरण अनशन के बीच किसानों से एकजुट होने की अपील करते हुए “बंटोगे तो लुटोगे” का नारा दिया। यह नारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चुनावी नारे “बंटोगे तो कटोगे” की तर्ज पर था, जो राज्य में चुनावी प्रचार के दौरान एक शक्तिशाली संदेश के रूप में उभरा था। टिकैत ने इस नारे के जरिए किसानों को एकजुट होने का संदेश दिया और आंदोलन की सफलता के लिए एकता को जरूरी बताया।
एकजुटता की जरूरत: किसानों का आंदोलन
Rakesh Tikait ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक वे एकजुट नहीं होंगे, उनकी मांगें पूरी नहीं हो सकतीं। उन्होंने बताया कि अलग-अलग राज्यों से आए किसानों का एकजुट होना बेहद जरूरी है, चाहे वे पंजाब, राजस्थान या उत्तर प्रदेश से हों। उनका मानना था कि अगर किसान एकजुट होकर रणनीति नहीं बनाते, तो उनकी आवाज दब सकती है। टिकैत ने अपने बयान में यह भी कहा, “यदि आप एकजुट नहीं होंगे, तो आपको पराजित किया जाएगा। सभी को मिलकर रहना होगा।” यह संदेश स्पष्ट रूप से किसानों के बीच एकता की आवश्यकता पर जोर दे रहा था।
डल्लेवाल का आमरण अनशन: स्वास्थ्य पर चिंता
किसान नेता Rakesh Tikait ने पंजाब के किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति पर चिंता भी जताई। डल्लेवाल, जो कि 70 वर्षीय कैंसर रोगी हैं, 26 नवंबर से पंजाब और हरियाणा के खनौरी बॉर्डर पर आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। उनकी प्रमुख मांगों में फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी शामिल है। Rakesh Tikait ने डल्लेवाल के समर्थन में किसानों से एकजुट होने की अपील की और कहा कि किसानों की आवाज तभी प्रभावी होगी जब वे एकजुट होकर अपनी मांगों के लिए संघर्ष करेंगे।
किसानों की एकजुटता का महत्व
Rakesh Tikait का यह संदेश विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि उनका मानना है कि किसान आंदोलन की सफलता के लिए सभी किसानों को एकजुट होना जरूरी है। वे समझते हैं कि अगर विभिन्न किसान समूहों के बीच कोई मतभेद रहेगा, तो उनके आंदोलन को कमजोर किया जा सकता है। Rakesh Tikait ने जोर दिया कि भारत के विभिन्न हिस्सों से आए किसान केवल अपने स्थानीय मुद्दों पर नहीं लड़ सकते, बल्कि उन्हें एक साझा रणनीति के तहत अपने संघर्ष को जारी रखना होगा। उनका कहना था कि एकजुटता ही किसान आंदोलन की असली ताकत है और यही कारण है कि किसान संगठन अपनी शक्ति को बनाए रखने के लिए एकजुट होकर काम कर रहे हैं।
पंजाब और हरियाणा में बढ़ते प्रदर्शन
Rakesh Tikait की अपील के बीच, पंजाब और हरियाणा में किसान आंदोलन तेज हो गया है। पंजाब और हरियाणा के किसानों ने डल्लेवाल के समर्थन में ट्रैक्टर मार्च निकाला और दिल्ली में होने वाले मार्च के विरोध में पुलिस कार्रवाई के बाद खनौरी और शंभु बॉर्डर पर डेरा डाला। इसके साथ ही किसानों ने “संयुक्त किसान मोर्चा” और “किसान मजदूर मोर्चा” के तहत दिल्ली चलो मार्च का नेतृत्व किया और अपनी आवाज को सरकार तक पहुंचाने के लिए संघर्ष जारी रखा।
आगामी रणनीति और रेल रोको आंदोलन
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने रविवार को “रेल रोको” प्रदर्शन की घोषणा की। 18 दिसंबर को किसानों ने दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक ट्रेन की आवाजाही को रोकने की योजना बनाई है। पंधेर ने संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) से अपील की कि वे इस आंदोलन में शामिल हों और किसानों की आवाज को मजबूती से उठाने के लिए अपनी रणनीति तय करें। इस प्रकार, किसान नेताओं ने अपनी एकजुटता और साझा संघर्ष को बढ़ावा देने के लिए कई आंदोलनकारी गतिविधियों की घोषणा की।
आंदोलन का बढ़ता हुआ समर्थन
किसान आंदोलन को लेकर कई संगठन अब एकजुट हो गए हैं और संघर्ष की रणनीतियों पर चर्चा कर रहे हैं। पंधेर ने बताया कि उन्होंने एक समिति बनाई है, जो सभी किसान संगठनों से संवाद करेगी और आगामी रणनीति तय करेगी। इसके साथ ही उन्होंने किसानों से एकजुट होने और अपने अधिकारों के लिए एकजुट संघर्ष करने की अपील की। किसानों का यह आंदोलन अब केवल पंजाब और हरियाणा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में इसका समर्थन बढ़ता जा रहा है।
तनाव के बावजूद India-Bangladesh के War Veterans कोलकाता और ढाका क्यों आ-जा रहे हैं?