कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उनकी विचारधारा संविधान विरोधी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और उपराष्ट्रपति जैसी संस्थाओं की स्वायत्तता खत्म की जा रही है और संसदीय परंपराओं को कमजोर किया जा रहा है। उनका कहना था कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है, जो हर नागरिक को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे का अधिकार देता है। लेकिन आज यही संविधान खतरे में है और सत्ता में बैठे लोग इसके मूल स्वरूप को बदलना चाहते हैं।
खरगे ने कहा कि भाजपा और आरएसएस के नेता संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्षता’ जैसे शब्द हटाना चाहते हैं, जबकि उनकी पार्टी के संविधान में ये शब्द मौजूद हैं। उन्होंने इसे दोहरे चरित्र का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए न्यायपालिका, चुनाव आयोग और मीडिया की स्वतंत्रता आवश्यक है, लेकिन जब न्यायाधीश धर्म विशेष के खिलाफ अपशब्द बोलते हैं और कोई कार्रवाई नहीं होती, तब यह लोकतंत्र नहीं, तानाशाही बन जाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में अल्पसंख्यकों और दलितों के साथ भेदभाव आम हो गया है। प्रधानमंत्री चुनावों में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं जो समाज को बांटते हैं, और चुनाव आयोग इस पर मौन रहता है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान में लाखों गरीबों, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के नाम हटाए जा रहे हैं। बिहार में ही करीब 65 लाख नाम हटाए गए हैं। यह संविधान निर्माताओं द्वारा दिए गए समान वोट मूल्य के अधिकार का उल्लंघन है।
खरगे ने कहा कि भाजपा सरकार और चुनाव आयोग की वजह से संवैधानिक अधिकार खतरे में हैं। उच्चतम न्यायालय ने इस पर चिंता जताई है, लेकिन चुनाव आयोग ने आधार कार्ड, राशन कार्ड और अन्य दस्तावेजों को मतदाता पहचान के लिए मान्यता देने से इनकार कर दिया है। देश की एक फीसदी आबादी के पास 40 प्रतिशत संसाधन हैं। उच्च शिक्षा आम आदमी की पहुँच से बाहर हो गई है और निजी कॉलेजों में साधारण स्नातक की फीस 60 लाख रुपये तक पहुंच गई है। सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं ताकि निजी संस्थानों को बढ़ावा मिले।
उन्होंने कहा कि विपक्षी सरकारों को गिराकर अल्पमत की सरकारें बनाई जा रही हैं, नेताओं पर झूठे मुकदमे चलाए जा रहे हैं, और सवाल पूछने वालों को जेल में डाला जा रहा है। सूचना के अधिकार कार्यकर्ताओं की हत्याएं हो रही हैं और कानून को कमजोर किया जा रहा है। संसद में विपक्षी सांसदों को बोलने नहीं दिया जाता और राज्यसभा में उपराष्ट्रपति के माध्यम से रिकॉर्ड संख्या में सांसदों को निलंबित किया गया।
खरगे ने आरोप लगाया कि जब उपराष्ट्रपति को अपनी संवैधानिक भूमिका का एहसास हुआ और उन्होंने स्वतंत्र रूप से कार्य करना शुरू किया, तब भाजपा और प्रधानमंत्री ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। यह संस्थाओं पर कब्जे का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने बताया कि उन्होंने उपसभापति को पत्र लिखकर संसद में सीआईएसएफ की मौजूदगी पर आपत्ति जताई है। संसदीय सुरक्षा सेवा को खत्म कर सीआईएसएफ को तैनात करना विपक्ष को डराने की कोशिश है। कांग्रेस ने संविधान बनाया था और अब उसकी गरिमा बचाने के लिए संघर्ष करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर बड़ा आंदोलन शुरू करने जा रही है।