1 से 7 अगस्त तक मनाए जा रहे विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा बाल मृत्युदर को कम करने, पोषण सुधारने और शिशु विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इस वर्ष की थीम है: “इन्वेस्ट इन ब्रेस्ट फीडिंग, इन्वेस्ट इन द फ्यूचर”।
राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों, जोनल निदेशकों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और उप मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जिला स्तर पर अति/उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (प.क) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। सभी गतिविधियों की मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

जन-स्वास्थ्य निदेशक ने बताया कि स्तनपान मां और शिशु दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मंच धात्री माताओं को सक्षम वातावरण देने, बाल मृत्युदर घटाने और पोषण सुधारने के लिए उपयोगी है। सार्वजनिक और निजी संस्थानों के स्टेकहोल्डर्स की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए प्रचार-प्रसार गतिविधियां चलाई जाएंगी।
आरसीएच निदेशक ने बताया कि आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर परामर्श देने और आंगनबाड़ी बैठकों में स्तनपान को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात को प्रसव के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराने की शपथ दिलाई जाएगी।