अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने सरकार को दी चेतावनी — मांगे नहीं मानीं तो 30 अक्टूबर से प्रदेशभर में आंदोलन की लहर उठेगी
प्रतापगढ़: अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ की जिला शाखा प्रतापगढ़ ने राज्य सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने की घोषणा की है। कर्मचारियों ने शनिवार को जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी 11 सूत्रीय मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की। महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो प्रदेशभर में “संघर्ष चेतना यात्रा” शुरू की जाएगी।
महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि 5 जनवरी 2025 को सरकार को प्रस्तुत मांग पत्र पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। शासन की उदासीनता को देखते हुए कर्मचारियों ने आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है।
आंदोलन की रूपरेखा इस प्रकार तय की गई है —
• 7 से 17 अक्टूबर: हर उपशाखा और दफ्तर में “कर्मचारी जागरण अभियान” चलेगा।
• 15 अक्टूबर: जिला स्तर पर चेतावनी धरना आयोजित किया जाएगा।
• 30 अक्टूबर से 20 नवम्बर: पूरे प्रदेश में “संघर्ष चेतना यात्रा” निकाली जाएगी।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि अब कर्मचारी आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं और अपनी जायज़ मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे।
मुख्य मांगें:
1. पीएफआरडीए अधिनियम रद्द कर ₹53,000 करोड़ जीपीएफ खातों में जमा किए जाएं।
2. समान कार्य, समान वेतन लागू करते हुए न्यूनतम वेतन ₹26,000 निर्धारित किया जाए।
3. सेवाकाल में पाँच पदोन्नति के अवसर मिलें।
4. संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
5. 60,000 मंत्रालयिक पदों पर भर्ती हो।
6. सचिवालय कर्मचारियों जैसी सुविधाएँ दी जाएं।
7. पारदर्शी ट्रांसफर नीति लागू हो।
8. “नो वर्क, नो पे” आदेश वापस लिए जाएं।
9. आरजीएचएस योजना की सभी सुविधाएँ बहाल हों।
10. सरकारी विभागों का निजीकरण रोका जाए।
11. पुलिस और आपात सेवा कर्मियों को साप्ताहिक अवकाश मिले।
ज्ञापन सौंपने वालों में राधेश्याम धाकड़, अब्दुल हकीम मंसूरी, अमरचंद जी, कारू लाल जनवा, सुनील गौड़, पुष्पेंद्र मीणा और प्रभुलाल मीणा सहित कई कर्मचारी नेता मौजूद रहे।
महासंघ ने कहा कि यदि सरकार ने वार्ता का रास्ता नहीं अपनाया, तो आगामी चरण में प्रदेशव्यापी आंदोलन की ज़िम्मेदारी खुद सरकार की होगी।