दहेज… एक ऐसा शब्द, जिसने न जाने कितनी बेटियों की ज़िंदगी निगल ली। जयपुर के महेश नगर थाना क्षेत्र से सामने आई यह घटना एक बार फिर समाज और सिस्टम दोनों पर सवाल खड़े करती है। 32 वर्षीय श्वेता राव ने कथित दहेज प्रताड़ना से तंग आकर ज़हर खा लिया। यह सब उस समय हुआ, जब उनका महज़ चार महीने का मासूम बच्चा उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा सहारा होना चाहिए था।
क्या है पूरा मामला?
परिजनों के अनुसार, शादी के बाद से ही श्वेता को ससुराल पक्ष द्वारा लगातार मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और दहेज को लेकर ताने दिए जा रहे थे। हालात इतने बिगड़ गए कि श्वेता पिछले एक महीने से अपने पीहर में रह रही थी। हाल ही में जब वह घर लौटी, तो उसने घर में गेहूं की टंकी में रखी सल्फ़ास की गोलियां खा लीं। हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिजनों के गंभीर आरोप
परिजनों का आरोप है कि श्वेता को ससुराल वालों द्वारा बार-बार यह कहा जाता था — “सुसाइड कर ले, हम दूसरी शादी कर लेंगे।”इन आरोपों के आधार पर महेश नगर थाने में पति नरेंद्र सिंह और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों के खिलाफ दहेज हत्या (Dowry Death) की धाराओं में FIR दर्ज की गई है। पुलिस कार्रवाई ,पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ,पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद श्वेता का शव परिजनों को सौंप दिया गया है ,पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की हर एंगल से जांच की जा रही है।
एक बार फिर वही सवाल
कानून मौजूद है ,धाराएं मौजूद हैं ,लेकिन फिर भी—
- क्या दहेज की मानसिकता कानून से ज्यादा ताकतवर है?
- कब तक बेटियां इस आग में जलती रहेंगी?
- और कब समाज इस चुप्पी को तोड़ेगा?
यह सिर्फ एक मौ*त नहीं…
यह उस सोच की हार है, जो आज भी दहेज को अधिकार समझती है।