Borewell खोदने के बाद छोड़ दिया, 3 साल की बेटी 150 फीट में फंसी

By Editor
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Borewell

राजस्थान: 700 फीट गहरे Borewell में फंसी 3 साल की बच्ची, बचाव कार्य जारी

राजस्थान के कोटपूतली क्षेत्र में एक 3 साल की बच्ची पिछले 19 घंटे से 700 फीट गहरे Borewell में फंसी हुई है, और उसे निकालने के लिए दिन-रात अथक प्रयास किए जा रहे हैं। यह घटना एक सामान्य Borewell खुदाई के दौरान हुई, जब बच्ची को अचानक उस बोरवेल में गिरने का हादसा हुआ। अब प्रशासन, अग्निशमन विभाग और अन्य विशेषज्ञ टीमें मिलकर उसे सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है।

Borewell के अंदर फंसी बच्ची चेतना का संघर्ष

चेतना नामक इस बच्ची का हादसा तब हुआ जब उसके पिता ने पानी की तलाश में 700 फीट गहरा Borewell खुदवाया, लेकिन जब पानी नहीं मिला, तो उसे छोड़ दिया गया। कुछ समय बाद बच्ची खेलते-खेलते बोरवेल में गिर गई। वह अब बोरवेल के 150 फीट गहरे हिस्से में फंसी हुई है। घटना के बाद से उसके बचाव के लिए कई बार प्रयास किए गए, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है।

बचाव कार्य में बढ़ती कठिनाइयाँ

Borewell इतना संकरा है कि बचाव कार्यों में कई प्रकार की मुश्किलें आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बोरवेल का व्यास बहुत छोटा है, जिससे बच्ची तक पहुंचना बहुत कठिन हो गया है। फिलहाल, बच्ची को बोरवेल में ऑक्सीजन भेजी जा रही है, ताकि वह सांस ले सके, लेकिन खाने-पीने का कोई इंतजाम नहीं किया जा सकता है क्योंकि बोरवेल की संकीर्णता इसकी अनुमति नहीं देती है।

रात के समय सीसीटीवी कैमरे में बच्ची के सिर का हल्का मूवमेंट नजर आया था, जिससे राहत की कुछ उम्मीदें बनीं। हालांकि, बच्ची के शरीर के बाकी हिस्से मिट्टी में फंसे होने के कारण उसकी हरकतें नहीं हो पा रही हैं। उसकी गर्दन से लेकर शरीर के नीचे तक वह पूरी तरह से दब चुकी है, जिससे उसे बाहर निकालना और भी मुश्किल हो गया है।

प्रशासन की नई योजना: हुक से बच्ची को खींचना

बचाव कार्य की गति को देखते हुए जिला प्रशासन ने एक नया तरीका अपनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत बोरवेल के पास 150 फीट खोदने की बजाय, बच्ची को हुक के जरिए खींचने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर खतरा है क्योंकि बच्ची को इस दौरान चोट लगने का डर है। ऐसे में प्रशासन ने बच्ची के माता-पिता और दादा से लिखित अनुमति ली है, जिसमें कहा गया है कि यदि इस बचाव प्रयास के दौरान बच्ची को कोई नुकसान पहुंचता है तो प्रशासन जिम्मेदार नहीं होगा।

इस कदम को इसलिए जरूरी माना जा रहा है, क्योंकि समय के साथ बच्ची की स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है और बचाव के लिए समय बेहद कम रह गया है। प्रशासन और बचाव दल इस कठिन कार्य को जल्द से जल्द अंजाम देने की कोशिश में जुटे हैं, ताकि बच्ची को किसी भी तरह का नुकसान ना हो और उसे सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

समय की कमी और सुरक्षा के उपाय

अधिकारियों के मुताबिक, बचाव कार्य में तेजी लाने के लिए विशेषज्ञों की टीम को लगाया गया है, लेकिन बोरवेल के आसपास की मिट्टी और चट्टानें इसे और भी जटिल बना रही हैं। इसका मतलब है कि बोरवेल के आसपास खुदाई में सप्ताहों का समय भी लग सकता है। हालांकि, बच्ची की स्थिति को देखते हुए समय की कोई गुंजाइश नहीं है और प्रशासन के लिए यह एक गंभीर चुनौती बन गई है।

इसके अलावा, प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बचाव कार्य के दौरान बच्ची को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। इसके लिए सभी सावधानियां बरती जा रही हैं, और हर कदम पर निगरानी रखी जा रही है। बच्ची को बचाने के लिए हुक से खींचने की प्रक्रिया भी बेहद संवेदनशील है, लेकिन समय के अभाव में यह कदम उठाया जा रहा है।

Borewell हादसों की बढ़ती संख्या

Borewell में गिरने की घटनाएं भारत में आम होती जा रही हैं, खासकर ग्रामीण और उपनगरों में, जहां ऐसी अनियंत्रित बोरवेल खुले छोड़ दिए जाते हैं। यह घटनाएं बच्चों के लिए विशेष रूप से खतरनाक साबित हो रही हैं। कई मामलों में, बच्चों के बोरवेल में गिरने के बाद समय पर बचाव कार्यों की कमी के कारण जान का नुकसान हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए Borewell के खुले मुंह को ढकने, उन्हें ठीक से बंद करने और सुरक्षात्मक उपायों को लागू करने की आवश्यकता है।

इसके साथ ही, ग्रामीण इलाकों में बच्चों के आसपास की सुरक्षा को और मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि इस प्रकार की दुर्घटनाओं से बचा जा सके। बोरवेल जैसी खतरनाक स्थितियों से बचाव के लिए प्रशासन और स्थानीय सरकारों को भी और अधिक सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

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