PM Modi ने जी20 सम्मेलन में ग्लोबल साउथ की चुनौतियों पर दिया जोर, खाद्य, ईंधन और उर्वरक संकट की बात की
ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित जी20 सम्मेलन में PM Modi ने वैश्विक दक्षिण (Global South) और उसकी चुनौतियों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि दुनिया में चल रहे संघर्षों और संकटों के कारण खाद्य, ईंधन और उर्वरक संकट जैसी समस्याएं सबसे ज्यादा ग्लोबल साउथ देशों को प्रभावित कर रही हैं। उनका मानना है कि जी20 देशों को इन देशों की समस्याओं को समझकर उनकी प्राथमिकताओं पर ध्यान देना चाहिए।
ग्लोबल साउथ पर संकटों का प्रभाव
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले कुछ सालों में दुनिया भर में युद्ध और संघर्षों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस कारण से खाद्य, ईंधन और उर्वरक की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिसका प्रतिकूल असर विकासशील और गरीब देशों पर पड़ा है। उन्होंने विशेष रूप से ग्लोबल साउथ देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों की अर्थव्यवस्था पहले ही कमजोर है और संकटों के कारण इनकी स्थिति और भी बिगड़ी है।
“हम देख रहे हैं कि जिन देशों में पहले ही सीमित संसाधन थे, वहां अब यह संकट और बढ़ गया है। खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा की सुरक्षा दोनों ही एक गंभीर चुनौती बन गई हैं,” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा। उनका कहना था कि यदि जी20 देशों को वैश्विक स्थिरता और समृद्धि की दिशा में काम करना है, तो उन्हें ग्लोबल साउथ की समस्याओं और प्राथमिकताओं पर गंभीरता से ध्यान देना होगा।
G20 को ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए
प्रधानमंत्री मोदी ने जी20 देशों से अपील की कि वे ग्लोबल साउथ की आवाज को सुनें और उनकी समस्याओं का समाधान ढूंढने की दिशा में काम करें। उन्होंने कहा कि जी20 देशों का कर्तव्य है कि वे उन देशों को सहयोग दें जो संघर्ष, युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ग्लोबल साउथ की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए विकासशील देशों को समर्थन और सशक्त बनाना बहुत जरूरी है।
“जी20 देशों को ग्लोबल साउथ की आवाज को मुख्यधारा में लाने का काम करना चाहिए। जब तक हम इन देशों के संघर्षों और जरूरतों को प्राथमिकता नहीं देंगे, तब तक वैश्विक समृद्धि का सपना अधूरा रहेगा,” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा। उनका यह भी मानना था कि ग्लोबल साउथ के देशों की आर्थिक उन्नति के लिए जी20 देशों को अपने संसाधनों और सहयोग को साझा करना चाहिए।
खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा संकट
प्रधानमंत्री मोदी ने खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के संकट पर भी विस्तार से बात की। उनका कहना था कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिति इतनी नाजुक हो चुकी है कि खाद्य और ऊर्जा की कीमतें दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं, और इससे सबसे अधिक प्रभावित उन देशों के लोग हो रहे हैं, जो पहले ही गरीबी और संघर्ष से जूझ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह संकट केवल इन देशों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी है।
“खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और उर्वरक की आपूर्ति संकट वैश्विक स्थिरता के लिए खतरे की संकेतक हैं। अगर इन समस्याओं का समाधान नहीं निकाला गया, तो पूरी दुनिया के विकास की गति धीमी हो जाएगी,” प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी।
G20 की भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने जी20 देशों की भूमिका को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल विकसित देशों के लिए नहीं, बल्कि विकासशील देशों की आवाज को भी सुनने का अवसर प्रदान करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह रेखांकित किया कि जी20 देशों को एकजुट होकर इन संकटों के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
“जी20 का उद्देश्य केवल आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि यह वैश्विक सहयोग और साझेदारी का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। हमें सुनिश्चित करना होगा कि इस मंच पर सभी देशों की जरूरतों को समान रूप से महत्व दिया जाए,” उन्होंने कहा।
जलवायु परिवर्तन और सतत विकास
प्रधानमंत्री मोदी ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे को भी उठाया और इसे ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एक बड़ी चुनौती बताया। उनका कहना था कि विकासशील देशों को इस मुद्दे से निपटने के लिए तकनीकी और वित्तीय समर्थन की आवश्यकता है। उन्होंने जी20 देशों से अनुरोध किया कि वे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए एक समग्र और समान दृष्टिकोण अपनाएं, ताकि सभी देशों को समान रूप से लाभ मिल सके।
“विकसित देशों को यह समझना चाहिए कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव सबसे ज्यादा उन देशों पर पड़ते हैं, जिनकी जलवायु पर निर्भरता ज्यादा है और जो पहले से आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं,” मोदी ने कहा।
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