माइंस व भू-विज्ञान विभाग के प्रमुख सचिव टी. रविकान्त ने बताया कि हरियालो राजस्थान अभियान के तहत खनन क्षेत्रों और विभागीय कार्यालयों में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है। अगस्त के पहले सप्ताह तक 11 लाख 74 हजार से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। विभाग, माइनिंग लीज धारकों के साथ समन्वय बनाकर पहली बार इतनी बड़ी संख्या में पौधारोपण का लक्ष्य पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के निर्देशन में माइनिंग सेक्टर में खनिज खोज को तेज करने, अवैध खनन पर रोक लगाने, वैध खनन को बढ़ावा देने और पर्यावरण संतुलन के लिए यह पहल की जा रही है।
टी. रविकान्त ने कहा कि खनन गतिविधियों से जुड़े होने के कारण पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी अधिक होती है। प्रत्येक जिले के उन खनन पट्टा क्षेत्रों में, जहां खनन कार्य पूरा होकर बंद हो चुका है, कम से कम एक खान को चिन्हित कर उसका पुनर्भरण और व्यापक वृक्षारोपण कराया जा रहा है। पहले साल में सिर्फ दो-तीन लाख पौधे ही लगाए जाते थे, जबकि इस बार संख्या कई गुना अधिक है।
उन्होंने बताया कि अतिरिक्त निदेशक स्तर के अधिकारी महेश माथुर को नोडल अधिकारी और सभी खनि अभियंताओं व सहायक खनि अभियंताओं को सहायक नोडल अधिकारी बनाया गया है। पौधारोपण के साथ मानसून सीजन में लगाए गए पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी भी संबंधित अधिकारियों और संस्थाओं को सौंपी गई है। वृक्षारोपण में नीम, बड़, पीपल, आम, शहतूत, शीशम, गुलमोहर, अशोक, जामुन जैसे छायादार और फलदार पेड़ों पर जोर दिया जा रहा है, साथ ही राजस्थान की भौगोलिक स्थिति के अनुरूप कम पानी और तेजी से बढ़ने वाले पौधे प्राथमिकता में हैं।
निदेशक माइंस दीपक तंवर ने बताया कि इस अभियान में विभागीय कार्यालयों के साथ माइनिंग लीजधारकों और माइनिंग क्षेत्र के एसोसिएशनों को भी जोड़ा गया है। राज्य नोडल अधिकारी महेश माथुर ने बताया कि आरंभिक आंकड़ों के अनुसार विभाग के 46 कार्यालयों ने 11,74,166 पौधे लगाए हैं। इनमें 50 हजार से अधिक पौधारोपण करने वाले कार्यालयों में उदयपुर (72,082 पौधे), राजसमंद (66,502), भीलवाड़ा (53,254), ब्यावर (51,530) और नागौर (49,772) शामिल हैं। पूरे प्रदेश में यह अभियान लगातार जारी है।