जयपुर, 08 फरवरी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर पर्यावरण प्रेमी संतों एवं प्रबुद्धजनों ने मुलाकात की। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बिश्नोई समाज के संतों एवं प्रतिनिधियों ने राज्य विधानसभा में 5 फरवरी को खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून लाए जाने की गई घोषणा पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। संतों ने कहा कि मुख्यमंत्री की यह श्रेष्ठ पहल ऐतिहासिक है। संतों के सान्निध्य में समाज के प्रबुद्धजनों ने भी मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण राज्य की जनता की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार विकास के साथ-साथ संरक्षण को भी बढ़ावा दे रही है। उनके अनुसार, खेजड़ी संरक्षण कानून जैसे कदम यह सुनिश्चित करते हैं कि भविष्य की पीढ़ियां भी प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता के महत्व को समझें और उसका संरक्षण करें।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बिश्नोई समाज के प्रकृति और पर्यावरण के प्रति समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज का यह समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणा है। संत-महंतों और समाज के प्रबुद्धजनों ने भी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर चर्चा की और जनता की भागीदारी से चलाए जा रहे विभिन्न पर्यावरणीय अभियानों की जानकारी साझा की।
कार्यक्रम में मुकाम पीठाधीश्वर रामानंद जी महाराज सहित कई पर्यावरण प्रेमी संत, समाज के प्रबुद्धजन और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। साथ ही, मंत्री केके विश्नोई, जसवंत विश्नोई और अन्य वरिष्ठ नेता भी कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए कहा कि खेजड़ी संरक्षण कानून समाज और पर्यावरण के हित में ऐतिहासिक कदम है। मुख्यमंत्री और बिश्नोई समाज के बीच यह मुलाकात पर्यावरण संरक्षण और समाजिक जागरूकता के संदेश को मजबूत करती है। खेजड़ी संरक्षण कानून के माध्यम से न केवल वन्यजीवों और पेड़-पौधों का संरक्षण सुनिश्चित होगा, बल्कि जनता और समाज को भी प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा मिलेगी। इस पहल को राज्य सरकार द्वारा विकास और संरक्षण का संतुलन बनाए रखने का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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