Share Market Crash के 4 प्रमुख कारण: सेंसेक्स 1,100 अंक गिरा, निफ्टी 24,000 के नीचे
28 नवंबर को भारतीय शेयर बाजार में अचानक Crash आई, जब सेंसेक्स 1,100 अंक तक लुड़क गया और निफ्टी 1 फीसदी से ज्यादा गिरकर 24,000 के नीचे आ गया। इस Crash की अगुआई प्रमुख आईटी और ऑटो कंपनियों के शेयरों ने की, जैसे इंफोसिस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टेक महिंद्रा, और टीसीएस, जिनके शेयर 2 फीसदी से अधिक गिरे। हालांकि, ब्रॉडर मार्केट में कुछ हद तक बढ़त देखने को मिली, बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में मामूली वृद्धि हुई। दोपहर 2:25 बजे तक सेंसेक्स 1,077 अंक गिरकर 79,156.36 अंक पर और निफ्टी 323 अंक गिरकर 23,952.05 पर कारोबार कर रहा था।
आइए, जानते हैं शेयर बाजार में इस गिरावट के चार प्रमुख कारण:
1. आईटी और ऑटो सेक्टर में गिरावट
शेयर बाजार में सबसे बड़ी Crash आईटी और ऑटो सेक्टर के प्रमुख शेयरों में आई। इंफोसिस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टेक महिंद्रा और टीसीएस जैसे प्रमुख कंपनियों के शेयरों में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। आईटी सेक्टर में विशेषकर टेक महिंद्रा और इंफोसिस के वित्तीय परिणामों पर निराशाजनक रुझान आने के कारण इन कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई। वहीं, ऑटो कंपनियों जैसे महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी के शेयरों में भी कमजोरी आई, जिसने निफ्टी और सेंसेक्स दोनों को नीचे खींचा।
2. वैश्विक बाजारों में दबाव
वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि ने निवेशकों के विश्वास को प्रभावित किया है। अमेरिका और यूरोप में बढ़ती महंगाई दरें और केंद्रीय बैंकों द्वारा कड़े मौद्रिक उपायों के कारण निवेशकों ने जोखिम कम करने की दिशा में कदम बढ़ाए। इससे अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में कमजोरी के संकेत मिले, जिसका असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी पड़ा।
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) ने भारतीय बाजार से अपनी निकासी जारी रखी, जिससे घरेलू बाजारों में दबाव आया। विदेशी निवेशकों की निकासी के कारण शेयरों में Crash आई और सेंसेक्स, निफ्टी जैसे प्रमुख इंडेक्स में भारी मंदी देखने को मिली। FII की निकासी से भारतीय रुपये में भी दबाव आया, जो वैश्विक निवेशकों के लिए अनिश्चितता का संकेत था। इसके परिणामस्वरूप भारतीय शेयर बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा और निवेशकों ने अधिक सतर्कता बरतनी शुरू की।
इस वैश्विक आर्थिक माहौल के चलते भारतीय बाजारों में निवेशकों का विश्वास डगमगाया और निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए मुनाफा वसूली की, जिससे भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ।
3. रुपया में गिरावट
भारतीय रुपये में Crash ने निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना खासकर तेल आयात पर नकारात्मक असर डाल रहा है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। तेल की कीमतों में वृद्धि और रुपये की कमजोरी के कारण आयात लागत में इजाफा हुआ है, जो महंगाई और व्यापार घाटे को बढ़ावा देता है। इसके अलावा, रुपये की कमजोरी ने विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार को और भी जोखिमपूर्ण बना दिया है, जिसके कारण उन्होंने मुनाफा वसूली शुरू की। इस अनिश्चितता के माहौल ने भारतीय शेयर बाजार में Crash को और तेज किया, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी में भारी नुकसान हुआ। निवेशकों के बीच चिंता बढ़ी और बाजार में मंदी का माहौल बना, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और घरेलू वित्तीय स्थिति से संबंधित निराशाजनक संकेतों को दर्शाता है।

4. मुनाफा वसूली और अनिश्चितता
शेयर बाजारों में पहले से बनी अनिश्चितता और बढ़ते वॉलाटिलिटी (उथल-पुथल) के कारण निवेशकों ने मुनाफा वसूली का रास्ता अपनाया। जैसा कि देखा गया है, जब बाजार में तेज़ी होती है, तो निवेशक मुनाफा निकालने के लिए शेयर बेचते हैं, जिससे गिरावट आती है। हाल के दिनों में बाजार में तेज़ी के बाद निवेशकों को यह प्रतीत हुआ कि अब सही समय है अपने निवेश को बेचने का और मुनाफा निकालने का। यह मुनाफा वसूली ने बाजार की Crash को और बढ़ा दिया।
इन कारणों ने मिलकर भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का कारण बने। जहां एक ओर कुछ सेक्टरों में हरियाली देखी गई, वहीं दूसरी ओर प्रमुख कंपनियों और वैश्विक परिस्थितियों के कारण बाजार में Crash आई।
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