हाईकोर्ट के जज कैसे हटाए जाते हैं? इंडिया गठबंधन ने जस्टिस Shekhar Yadav के खिलाफ खोला मोर्चा

By Editor
5 Min Read
Shekhar Yadav

जज Shekhar Yadav के खिलाफ बर्खास्तगी की प्रक्रिया: भारतीय संविधान और कानून के तहत प्रक्रिया

इन दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज Shekhar Yadav को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। इंडिया गठबंधन (INDIA) के सांसदों ने जज Shekhar Yadav के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनके बर्खास्तगी की मांग की है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब जज यादव ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) के एक कार्यक्रम में विवादास्पद बयान दिया

जिसके बाद Shekhar Yadav बयान को लेकर विपक्षी दलों ने गंभीर आपत्ति जताई। सांसदों का कहना है कि इस प्रकार का बयान जज की निष्पक्षता और कार्यक्षमता पर सवाल उठाता है, जिससे उनके खिलाफ बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। इस विवाद ने एक बार फिर से भारतीय न्यायपालिका और राजनीति के बीच के रिश्तों को केंद्र में ला दिया है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि भारतीय संविधान और कानून के तहत हाईकोर्ट के जज की बर्खास्तगी की प्रक्रिया क्या है।

जज की बर्खास्तगी के लिए संविधान में क्या प्रावधान हैं?

भारतीय संविधान में किसी भी न्यायधीश, विशेषकर हाईकोर्ट के जज, की बर्खास्तगी के लिए स्पष्ट प्रावधान हैं। संविधान के धारा 124 और धारा 218 में जज की बर्खास्तगी से संबंधित प्रक्रियाओं का वर्णन किया गया है।

धारा 124 के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा किसी जज को तब तक हटाया नहीं जा सकता है, जब तक कि संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) द्वारा उसके खिलाफ महाभियोग पारित नहीं किया जाता। यह महाभियोग प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में एक प्रस्ताव के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिसे कम से कम दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन प्राप्त होना चाहिए। यदि दोनों सदनों में प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो राष्ट्रपति उस जज को पद से हटा सकते हैं।

धारा 218 के तहत उच्च न्यायालय के जजों के आचरण और कार्यक्षमता की निगरानी का अधिकार राष्ट्रपति को है। यदि जज के खिलाफ किसी प्रकार की अनुशासनहीनता या अक्षम्यता का आरोप लगता है, तो यह मामले पहले संसद में उठाए जाते हैं, और अगर मामला गंभीर होता है, तो उसकी जांच की प्रक्रिया शुरू होती है।

जजों की बर्खास्तगी के लिए जज अधिनियम, 1968

जज अधिनियम, 1968 के तहत जजों की बर्खास्तगी की प्रक्रिया को विस्तार से बताया गया है। इसके अनुसार, यदि किसी जज के खिलाफ दुराचार या अक्षम्यता का आरोप लगाया जाता है, तो यह मामला संसद के एक सदन में उठाया जाता है। यदि लोकसभा में यह प्रस्ताव लाया जाता है, तो इसे कम से कम 100 सांसदों द्वारा और राज्यसभा में 50 सांसदों द्वारा प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है। इसके बाद, लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा अध्यक्ष उस प्रस्ताव को स्वीकार करने या न करने का निर्णय लेते हैं। यदि प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है, तो एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जाता है, जो आरोपों की जांच करती है।

यह समिति जांच करती है कि क्या आरोप सही हैं और क्या जज के खिलाफ कार्रवाई करने की जरूरत है। यदि समिति के द्वारा आरोपों को सही माना जाता है, तो महाभियोग प्रक्रिया शुरू होती है। इसके बाद, दोनों सदनों में महाभियोग पारित किया जाता है, और यदि दोनों सदनों में दो-तिहाई समर्थन प्राप्त होता है, तो राष्ट्रपति उस जज को पद से हटा सकते हैं।

जज Shekhar Yadav के खिलाफ बर्खास्तगी की प्रक्रिया

जज Shekhar Yadav के मामले में, इंडिया गठबंधन के सांसदों ने उनके खिलाफ बर्खास्तगी की मांग की है, क्योंकि उनका बयान जज की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। उनका कहना है कि Shekhar Yadav का यह बयान न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर आक्षेप है। इस संदर्भ में यह सवाल उठता है कि क्या इस मामले में जज के खिलाफ बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

सबसे पहले, यह जरूरी है कि आरोपों की जांच की जाए और यह तय किया जाए कि जज ने कोई ऐसा कदम उठाया है, जो उनकी निष्पक्षता को प्रभावित करता है। अगर यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

लालू और पवार से मिले समर्थन पर भावुक हुईं Mamta Banerjee, दिया बड़ा बयान

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *